पत्रकारिता निष्पक्ष एवं निडर क्रांतिकारी अंदाज में बदलाव लाने के साथ पत्रकारों को स्वतंत्र भूमिका निभाने की है जरूरत- आदित्य

आज विश्व हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष लेख के माध्यम से अंबिकापुर निवासी राष्ट्रवादी युवा समाजसेवी एवं कलमकार आदित्य गुप्ता ने अपने विचारों को साझा करते हुए समाज के प्रति पत्रकारों की भूमिका बताई आज केेे समय में पाठक की रुचि, उसके पास खबरें पढ़ने के लिए उपलब्ध समय व नई पीढ़ी की जरूरतों को मद्देनजर रखते हुए हिंदी पत्रकारिता क्रांतिकारी बदलाव के दौर से गुजर रही है। पत्रकारों को बदलाव के इस वक्त को ध्यान में रखकर नए मानक और आदर्श स्थापित करने की आवश्यकता है।

भारत सम्मान – हमारे लोकतंत्र में हर स्तंभ को देश व समाज के हित में स्वविवेक से निर्णय लेने का अधिकार है। यह अधिकार मीडिया को भी हासिल है। लेकिन उसे खबरों की रिपोर्टिंग में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह बेहतर समाज के निर्माण के लिए अपेक्षित मूल्यों के अनुरूप हो। आखिर पत्रकारिता का लक्ष्य अच्छे समाज का निर्माण करना भी है।

पत्रकारिता जगत से जुड़े समाचार प्रकाशन करने एवं लिखने वाले पत्रकारों को बिल्कुल निष्पक्ष होना चाहिए समाचार माध्यमों को न तो किसी विचारधारा के प्रति अंधभक्त होना चाहिए और न ही अंध विरोधी। हालांकि यह भी सर्वमान्य तर्क है कि तटस्थता सिर्फ सिद्धांत ही है। निष्पक्ष रहना संभव नहीं है। हालांकि भारत में पत्रकारिता का एक सुनहरा इतिहास रहा है, जिसके अनेक पन्नों पर दर्ज है कि पत्रकारिता पक्षधरिता नहीं है। निष्पक्ष पत्रकारिता संभव है। कलम का जनता के पक्ष में चलना ही उसकी सार्थकता है। यदि किसी के लिए निष्पक्षता संभव नहीं भी हो तो न सही। भारत में पत्रकारिता का एक इतिहास पक्षधरता का भी है। इसलिए भारतीय समाज को यह पक्षधरता भी स्वीकार्य है लेकिन, उसमें राष्ट्रीय अस्मिता को चुनौती नहीं होनी चाहिए। किसी का पक्ष लेते समय और विपरीत विचार पर कलम तानते समय इतना पत्रकार जरूर ध्यान रखें कि राष्ट्र की प्रतिष्ठा पर आँच न आए। प्रत्येक पत्रकारों को इसका विशेष ध्यान होना चाहिए कि हमारी कलम से निकल बहने वाली पत्रकारिता की धारा भारतीय स्वाभिमान, सम्मान और सुरक्षा के विरुद्ध न हो। मेरे कहने का अभिप्राय इतना-सा है कि हमारी पत्रकारिता में भी ‘राष्ट्र सबसे पहले’ का भाव जागृत होना चाहिए। वर्तमान पत्रकारिता में इस भाव की अनुपस्थिति दिखाई दे रही है। यदि पत्रकारिता में ‘राष्ट्र सबसे पहले’ का भाव जाग गया तब पत्रकारिता के समक्ष आकर खड़ी हुई ज्यादातर चुनौतियां स्वत: ही समाप्त हो जाएंगी। हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तंड का जो ध्येय वाक्य था- ‘हिंदुस्थानियों के हित के हेत’। अर्थात् देशवासियों का हित-साधन। यही तो ‘राष्ट्र सबसे पहले’ का भाव है। समाज के सामान्य व्यक्ति के हित की चिंता करना। उसको न्याय दिलाना। उसकी बुनियादी समस्याओं को हल करने में सहयोगी होना। न्यायपूर्ण बात कहना।

समाज एवं जनहित में पत्रकारिता का उद्देश्य –

पत्र- पत्रिकाओं में सदा से ही समाज को प्रभावित करने की क्षमता रही है। समाज में जो हुआ, जो हो रहा है, जो होगा, और जो होना चाहिए यानी जिस परिवर्तन की जरूरत है, इन सब पर पत्रकार को नजर रखनी होती है। आज समाज में पत्रकारिता का महत्व काफी बढ़ गया है। इसलिए उसके सामाजिक और व्यावसायिक उत्तरदायित्व भी बढ़ गए हैं। पत्रकारिता का उद्देश्य सच्ची घटनाओं पर प्रकाश डालना है, वास्तविकताओं को सामने लाना है। इसके बावजूद यह आशा की जाती है कि वह इस तरह काम करे कि ‘बहुजन हिताय’ की भावना सिद्ध हो

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here