बागी कलम :- “जीवन के अनगिनत रिश्तें…!”

कुछ खून के, कुछ एहसास के और कुछ विश्वास के.!

भारत सम्मान (शहडोल)-
रिश्तों के विविध नाम, पर इन सब में जो सबसे खूबसूरत रिश्ता हैं वो हैं दोस्ती का। दुनियां में जब भी खूबसूरत रिश्तों की बात आती है तो “दोस्ती” का जिक्र सबसे पहले आता है। ईश्वर द्वारा प्रदत्त सबसे दुर्लभ उपहार है एक सच्चा दोस्त.! किन्तु आज के परिवेश में ये खूबसूरत रिश्ता भी छलावा बनकर रह गया है, अपना अर्थ ही खो चुका है। बहुत विरले लोग ही इस रिश्ते की गरिमा को बनाए हुए हैं, इसके अर्थ को सार्थक किए हैं।

मित्रता एक उत्तरदायित्व है न कि स्वार्थपूर्ति का अवसर –
मित्र बनना और बनाना बहुत आसान है, किन्तु मित्रता निभाना अत्यन्त जटिल। यह एक ऐसा फूल है जो कभी मुरझाता नहीं है, इसकी महक से सम्पूर्ण जीवन सुवासित हो उठता है। बस इसे थोड़ी देखभाल चाहिए, प्यार की परवरिश और विश्वास के जल से इसे सींचना पड़ता है। क्योंकि नि:स्वार्थ मित्रता में स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं होती, जहां स्वार्थ आ जाएं वहीं इसका अंत हो जाता है।

मित्रता की परीक्षा विपत्ति में दी गई मदद से ही संभव है –
सिर्फ मीठा बोलने वाले लोग दोस्त नहीं होते। एक लंबे वक्त तक तर्क की कसौटी पर जब व्यक्ति खरा उतरता है, तभी वह सही मायने में दोस्त बन सकता है। मित्रता पवित्र व शाश्वत प्रेम है, यह प्रेम का सर्वोच्च रुप है जहां लेन-देन नहीं किया जाता। जहां शर्तों में नहीं बांधा जाता, इस दुर्लभ रिश्ते में लेना कुछ नहीं अपितु देने में ही आनंद आता है। एक आदर्श व सच्ची दोस्ती का सबसे खूबसूरत गुण यही है कि वह हमें समझे और हम उन्हें.!

ईश्वर द्वारा प्रदत्त, दुर्लभ उपहार है एक सच्चा मित्र –
दोस्त ऐसा होने चाहिए जिसके होने से हमें संबल मिले, सिर्फ खुशी में ही नहीं वरन दुःख में भी वो हमारे साथ रहें। हर विषम परिस्थितियों मे हमारा साथ निभाने को तैयार रहें। दोस्त समझदार व निपुण होना चाहिए ताकि कभी जीवन की कठिन डगर में अगर हम भटक जाएं, तो वो अपने ज्ञान से हमारा मार्ग प्रस्त कर सके। मुश्किल परिस्थितियों में ऐसे दोस्त ही हमारा सहारा बनते हैं, जो हमें समझ सकें और हमारी स्थितियों को समझते हुये बेहतर सुझाव दे सकें।

मित्रता में अहंकार के लिए कोई जगह नहीं होती –
मित्रता बहुत बड़ी तपस्या हैं जो कि आज के परिवेश में दुर्लभ हो गई हैं। क्योंकि मनुष्य के लिए स्वार्थ सहज है, निस्वार्थ दुर्लभ है.! मित्रता एक ऐसा शब्द जिसकी कल्पना मात्र से ही मन प्रफुल्लित हो उठता है। विगत व अग्रसरित जीवन मे प्रत्येक वह व्यक्ति जिसने आपके साथ अपने मूल्यवान समय को साझा किया, “वह मित्र है”। मित्र की उपयोगिता जीवन के यथार्थ को आकार देती है, और हम सभी को इसे निःस्वार्थ स्वीकार करना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here