नए सफर पर…….केसरिया कांग्रेसी

राजनीति की खाट पर बंधी पड़ी नाराज़गी.!

नई राह के मुसाफिर बिसाहूलाल का यह सफर कैसा होगा। नए-नए हमराह बने नए-नवेले साथी मंजिल तक पहुंचाएंगे या फिर यह चुनावी सफर भ्रम में लड़ा जाएगा। यूं तो भ्रम और हकीकत के बीच एक महीन सी लकीर होती है, किंतु मायने बृहद होते हैं। नेता जन सेवक होते हैं.! यह जनता का भ्रम होता है। वह जनता के पालनहार होते हैं यह हकीकत है।

भारत सम्मान (अनूपपुर)-
मार्च में सत्ता के हस्तांतरण होने के बाद से हर उस विधानसभा सीट पर समीकरण बदल चुके हैं जहां उपचुनाव होने हैं। लेकिन इनमें सबसे खास है अनूपपुर की सीट, यहां सियासत बिसाहू लाल के इर्द-गिर्द ही रही। बिसाहू लाल कांग्रेस की ताकत रहे, तो उनका विरोध भाजपा की राजनीतिक जमीन। अब सब बदल चुका है। यहां दिग्गज भाजपा के पाले में हैं, तो कांग्रेस को बिसाहू के विरोध में नई शुरुआत करनी होगी। 2018 में विस चुनाव में कांग्रेस के टिकट से विधायक बने बिसाहू लाल अब भाजपा में हैं और शिवराज कैबिनेट में खाद्य मंत्री हैं व भाजपा से उन्हे टिकट मिलना तय है।

केसरिया कांग्रेसी व गुटों में विभाजित भाजपा –
भाजपा के नेताओं के साथ ही निचले स्तर के कार्यकर्ता कांग्रेसियों के गले में हार डालने को ठीक नहीं मानते। पिछले कुछ सालों में ऐसे नवांगतुकों के कारण वे घर बैठते जा रहे हैं। यही नहीं, पूरे जिले के साथ ही विधानसभा क्षेत्र में पार्टी स्पष्टत: और अभूतपूर्व ढंग से दो फांकों में बटी नजर आने लगी है। धीरे-धीरे खाँटी कार्यकर्ता का घर बैठना और गुटों में विभाजित होना भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। क्योंकि कैडर आधारित दल होने के कारण भाजपा की शक्ति का आधार यही कार्यकर्ता और सांगठनिक अनुशासन रहे हैं। यही वजह है कि विधानसभा के आने वाले उपचुनाव में केसरिया कांग्रेसी को टिकट देने से भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मौन साध लिया है। लिहाज़ा पार्टी की उत्साहकारी विजय की राह में रोड़े दिखाई दे रहे हैं।

तो…..राम के भरोसे उपचुनाव की वैतरणी –
आश्चर्य होता है कि 20 साल पहले रामलाल के भरोसे अपनी राजनीतिक यात्रा को उड़ान देने वाली भाजपा इतने वर्षों में स्वयं में यह भरोसा नहीं जगा पाई कि वह जनता के विकास और उसके हित में किए किसी काम के भरोसे भी चुनाव जीत सकती है। देश में आम चुनाव हों या विधानसभा चुनाव या फिर उपचुनाव, हर बार रामलाल को किसी न किसी बहाने सियासी मैदान में उतार दिया जाता है। इस बार भी उपचुनाव की वैतरणी पार करने के लिए भाजपा रामलाल के भरोसे नज़र आ रही है। जाहिर है कि धोखा, बगावत और गद्दार बनाम लोकतंत्र की लड़ाई के नारों से भरे कांग्रेसियों के शोर को वोट में बदलकर चुनावी चौसर जीत लेना भाजपा का मकसद है। भाजपा के स्थानीय नेताओं को अपनी जमीन खोती दिख रही है। उन्हें लगता है कि पूरी जिंदगी जिस नेता की राजनीति का विरोध करते रहे, अब उसी की जय-जयकार करनी होगी। अंदरखाने बगावत की भनकलगने के बाद बिसाहू लाल भाजपा मुख्यालय में दंडवत कर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि भाजपा बगावती और भीतरघाती साबित होने वाले तेवरों को ठंडा करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकता है।

सत्ता की लालच ने क्या-क्या दिन दिखाए –
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का अनूपपुर आगमन हुआ। मंच भी सजाएं गए, ताली थाली और शंख भी बजाए गए। कल तक जो भाजपा के नेता, हो चुके खाद्य मंत्री बिसाहूलाल पर इस बात का आरोप लगाकर विरोध कर रहे थे कि उन्होंने गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड बनवा कर शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न प्राप्त किया, वह एक भ्रष्ट आचरण था। आज वही सब नेता बिसाहूलाल का जय जयकार कर रहे हैं और शिवराज सिंह चौहान मंच पर बैठकर मंद मंद मुस्कुरा कर, इन बदली हुई परिस्थितियों का आनंद ले रहे थे। यह चुनाव दो विचारधारा के बीच नहीं बल्कि कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस का होगा और भाजपा सिर्फ उसकी सिपहसालार होगी.! सत्ता सुख ने सिद्धांतों और लोकतंत्र के महानतम उद्देश्य को तिलांजलि दे दी, मध्य प्रदेश का यह विधानसभा का उपचुनाव इस बात के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।

उपचुनाव के मुद्दे –
जहां तक स्थानीय मुद्दों और मांग की बात है तो रेलवे फ्लाई ओवर ब्रिज और जिला अस्पताल सबसे बड़ा मुद्दा था, जो अब पूरा होने की दिशा में बढ़ चुका है। इसके लिए सरकार रूपए जारी कर चुकी है। म.प्र. के अन्य जिलों की तरह यहां भी किसान की कर्जमाफी का मुद्दा गरम रहा है। स्थानीय मांग  सीतापुर गांव से मुख्य सड़क जाने वाली सड़क की मरम्मत व नई सड़क निर्माण की मांग गांव में पीने के पानी की समस्या, खराब आरसीसी सड़क, प्रमुख है। खराब सड़क की बातें इस बार भी उठेंगी एवं भृस्टाचार भी चुनाव को प्रभावित कर सकता है।

जातिगत आंकड़े –
अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र में जातिगत आंकड़े चुनाव में महत्वपूर्ण होते हैं। विधानसभा क्षेत्र में राठौर 10.50 प्रतिशत, पटेल 12.10 प्रतिशत, क्षत्रिय व ब्राह्मण 14.20 प्रतिशत  और 11.50 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। अनूपपुर विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा कोल समाज प्रभावित करता है जिसके वोट एकतरफा पड़ते हैं, जो निर्णायक होते हैं और शेष मुद्दे गौण रह जाते हैं। इस बार भी ऐसा ही हो, इसमें संदेह नहीं है।

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