अपोलो प्रबंधन ने युवक को कोरोना पॉज़िटिव बताकर परिजनो से लूटे पैसे,युवक की हुए मौत

दूसरे अस्पताल में कोरोना जाच रिपोर्ट निगेटिव

लापरवाही से हुई युवक की मौत परिजनों ने लगाये अपोलो प्रबन्धन पर गंभीर आरोप

बिलासपुर।नीलेश मसीह – कहते है डॉ भगवान का रूप होते है। पर अपोलो के डॉक्टरों ने इंसानियत की सारीहदे पार करते हुए लोगों की मज़बूरी का फायदा उठा रहे है। लोगों को कोरोना का डर दिखा कर लुटा जा रहा है। कोरोना की आड़ में नेगेटिव मरीज़ो से भी मन चाहे पैसे लुटे जा रहे है। ऐसा ही एक ताज़ा मामला सोमवार 14 सितम्बर को प्रकाश में आया  जिसमें अपोलो प्रबन्धन का नया कारनामा उजागर हुआ है। जिसमें अपोलो प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं।

आपको बता दें  एक 20 वर्षीय युवक की तबियत बिगड़ने पर उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां डॉक्टरों ने  पहले तो युवक को कोरोना पॉजिटिव बताया गया, फिर उसे अन्य कई बीमारियो से ग्रसित होने का दावा करते रहे। इसी बीच उसकी इलाज़ के दौरान मौत हो गई। वहीं, जब मौत के बाद उसकी जांच कराई गई तो मृतक की रिपोर्ट नेगेटिव आई ,जिसे सुनकर  परिजनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।जानकारी के मुताबिक मृतक को कोरोना पॉज़िटिव बता कर उसके परिजनों से लाखों रुपए वसूल किए गए और बाद में उसकी रिपोट निगेटिव आ गई वहीं, इस पैसे के खेल में युवक की सांसें थम गई।

संजीवनी नहीं अभिशाप बना अपोलो अस्पताल

जब ज़िले में अपोलो अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा था,तब लोग इसे संजीविनी समझ रहे थे, पर उन्हें क्या पता था जिसे वे संजीवनी समझ रहे है वो भविष्य में लोगों के लिए अभिशाप बन जाएगा। कहने को तो अपोलो अस्पताल में हर बीमारी का उपचार होता है पर यहाँ के डॉक्टर अब मरीज की जान बचाने के बजाय सिर्फ़ पैसे ऐंठने पर आमादा है। हाल ही में अपोलो अस्पताल के एक डॉ. के ऊपर इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगा है जिसका विरोध अभी भी ज़ारी है परिजनों के अलावा शहरवासी भी उस डॉक्टर के खिलाफ़ हत्या का मामला दर्ज़ करने की बात कर रहे हैं

हमेसा लगते आए है अस्पताल प्रबंधन के ऊपर कलंक

इससे पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें अपोलो अस्पताल प्रबंधन के ऊपर कलंक लगा है इसके बावजूद अपोलो प्रबंधन अपनी आदतों से बाज़ नहीं आ रहा है वैसे तो डॉक्टर भगवान का रुप होते हैं पर अपोलो अस्पताल के डॉक्टर यमराज बनते जा रहे हैं। यहां भर्ती मरीज़ के पीछे उनके परिजन लाखों खर्च करते हैं क्योंकि उनके  परिवार के  सदस्य की जान बच जाए पर अंत में उनके हाथ में लाश थमा दी जाती है।आपको बता दें बैकुंठपुर के मनेन्द्रगढ़ में रहने वाला 20 वर्षीय युवक की बीते दिनों अचानक तबीयत खराब हुई और उसे आनन फानन में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर्स का कहना था की उसकी दोनों किडनी डैमेज हो चुकी है। साथ ही युवक को कोरोना पॉज़िटिव भी बताया गया था वहीं ,परिजनों की मानें तो हॉस्पिटल में न ही उसका ढंग से इलाज़ हो रहा था और न ही उसे अपने परिजनों से मिलने दिया जा रहा था। परिवार वाले भी इस उम्मीद में पैसे पानी की तरह बहा रहे थे, कि उनके बेटे की जान बच जाए। पर ऐसा हुआ नही बल्कि उसकी हालत गंभीर होते चले गई, जिसके बाद मृतक को 4 दिनों पहले ही आईसीयू में रखा गया था। इस दौरान  युवक अपने परिजनों से मिलने की गुहार लगाता रहा और आख़िर उसने 13 सितंबर की रात 9 बजे दम तोड़ दिया।

नेगेटिव पॉजिटिव का खेल

मौत के बाद जब परिजनों ने बॉडी की मांग की तो उन्हें इनकार करते हुए कहा कि मरीज कोरोना पॉज़िटिव था। लेकिन RTPCR रिपोर्ट के मुताबिक़ मृतक की कोरोना नेगेटिव आई थी । इस पूरे मामले में ये तो स्पष्ट हो गया कि कोरोना के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है और डॉक्टरी के पेशे को बदनाम करने भी कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है वहीं, देर रात दबाव बनाने के बाद अपोलो प्रबंधन ने शव को परिजनों को सौंप दिया ।

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