अंधविश्वास के मेले में पहुचने वाले लोगो को इस बात से बरगलाया जा रहा है कि जो बाबा के दरबार मे हाज़िरी लगाएगा उसे कोरोना जैसी बीमारी छू तक नही पाएगी।

थाने से 2 किमी की दूरी पर चल रहा अंधविश्वास का खेल

कोरोना काल में झाड़ फूंक के नाम पर जुट रही हजारों की भीड़

अंधविश्वास के मेले में आने और कोरोना नही होने का हो रहा दावा

कोरिया।विनीत जायसवाल-थाने से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर अंधविश्वास का खेल चलता है और पुलिस व प्रशासन को इसकी भनक तक नही लगती। अंधविश्वास के खेल में कोरोना को लेकर जारी दिशा निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जाती है और पुलिस इससे अनिभिज्ञ रहती है। देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है और गाँव मे कोरोना के नाम पर अंधविश्वास की घूंटी पिलाई जा रही है। मध्यप्रदेश की सीमा पर  स्थित छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के भरतपुर विकासखंड के दूरस्थ  ग्राम बरौता में कोरोना काल मे आस्था के नाम पर हजारों की भीड़ जुटाई जा रही है और दुख दर्द के साथ कोरोना जैसी बीमारी भी ठीक करने का दावा किया जा रहा हैं। भरतपुर विकासखंड से 30 किलोमीटर दूर और कोटाडोल थाने से 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित इस गाँव में अंधविश्वास के मेले में पहुचने वाले लोगो को इस बात से बरगलाया जा रहा है कि जो बाबा के दरबार मे हाज़िरी लगाएगा उसे कोरोना जैसी बीमारी छू तक नही पाएगी। हर सोमवार को यहां सीधी जिले के महुआ गांव के तथाकथित बाबा द्वारा अंधविश्वास की खुराक जमकर पिलाई जा रही है। इसके एवज में बाबा द्वारा नारियल और पैसे की दक्षिणा ली जा रही है। जादू टोना के चक्कर में कई गांवों के लोग बाबा के पास आते हैं। ग्राम बरौता तिराहे पर बाबा स्थान पर शिव चर्चा के नाम पर अंधविश्वास का खेल यहां हर सोमवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक होता है। पूरे कोरोना काल मे यहां हर सोमवार अंधविश्वास की भीड़ जुटी। आधुनिकता और विज्ञान के इस दौर में आज भी गांवों में अंधविश्वास हावी है। इसके नाम पर कारोबार भी चलता है।

कोरोना को न्यौता
जिस गाँव मे यह अंधविश्वास का मेला लग रहा है वहा कोरोना जैसी घातक बीमारी को न्यौता देने का काम किया जा रहा है। बगैर प्रशासन के परमिशन के हजारों की भीड़ 5 घण्टे तक जुटाई जा रही है। इनमें से कोई मास्क पहना नजर नही आया और न ही यहां सोशल डिस्टेंसिंग देखी गई।

कोरोना महामारी के संक्रमण से जूझ रहे देश मे जहाँ धार्मिक स्थल भी कई तरह के नियमो के साथ खुले है। वहां इस तरह का अंधविश्वास का मेला लगना और प्रशासन को इसकी भनक न होना भी कई तरह के सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन के संज्ञान में यह मामला आने के बाद इस अंधविश्वास के मेले में कब रोक लगती है।

पुलिस अधीक्षक ने उक्त मामले में कहा
मुझे इस मामले की जानकारी नही है। मैं कोटाडोल टीआई से पूरी जानकारी लेता हूं। कोरोना काल मे अगर ऐसी भीड़ जुट रही है तो गलत है।
चंद्रमोहन सिंह
पुलिस अधीक्षक

विभागीय अधिकारी राजस्व का कहना

आपके द्वारा मेरे संज्ञान में ये मामला आया है। बरौता गाँव कोटाडोल थाने के नजदीक है। टीआई को बोलता हूं जाकर देखे।
वीरेंद्र लकड़ा
एसडीएम

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