सफाई कर्मचारियों की मांग पूरी नही हुई तो आंदोलन की चेतावनी।

बिलासपुर, नीलेश मसीह-स्मार्ट सिटी के ओर अग्रसर बिलासपुर शहर को स्वच्छ बनाने में महत्ती भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मचारी मूलभूत सुविधाओं के आभाव में जीने मजबूर है। कहने को तो शहर के विभिन्न जगहों में 24 घन्टे सफाई की व्यवस्था करने कर्मचारी तैनात रहते है। लेकिन जब बात इन कर्मचारियों की सुविधा की आती है। तो अधिकारियों के हाथ पैर फूल जाते है।

जिससे परेशान शहर के सफाई कर्मचारियों ने मंगलवार को अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जहाँ उन्हें शहर के भीतर बसाये जाने सहित विभिन्न समस्याओं के निदान करने को मांग जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान समस्त सफाई कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में सफाई कर्मचारियों को शहर से दूर बहतराई में विस्थापित कर दिया गया है। जहाँ से देर रात्रि आवागमन में कर्मचारियों को दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है। यही नही, जिस बिल्डिंग में उन्हें रखा गया है वहाँ टॉयलेट महीनों से जाम पड़ी हैं। साथ ही कई मकानों में तो खिड़की दरवाजे भी नही लगे हैं।ऐसे में सफाई कर्मचारियों के साथ उनके पूरे परिवार के लोगों में डर बना हुआ है।

कोरोनाकाल में भी सफाई कर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना निगम के 70 वार्डों की निरंतर सफाई कर रहे थे, पर उन्हें क्या पता था कि इस काम का पुरुस्कार इन्हें निगम इनके आशियानों पर बुलडोजर चला कर देगा, यह सफाईकर्मी करीब 13 साल से अवैध कब्जे पर रह रहे थे जिन्हें नोटिस देकर घर खाली करने कहा गया पर इन्होंने वहीं पर ही घर बनाने की मांग की थी, लेकिन निगम ने इन्हें बहतराई अटल आवास भेज दिया। जंहा असुविधाओं का अंबार है वही बहतराई अटल आवास में शिफ्ट होने के बाद इन्हें काम पर आने लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

₹6 से 8 हज़ार की तनख्वाह है जिसमें दो से ढाई हजार का तेल जल जाता है ऐसे में ये कर्मचारी इस महंगाई में अपने परिवार का पेट कैसे पा लेंगे,? साथ ही इनके बच्चों की शिक्षा में भी प्रभाव पड़ रहा है भले ही यह कर्मचारी पढ़े लिखे नहीं हो पर ये लोग अपने बच्चों को अपनी तरह नहीं बल्कि शिक्षित बनना चाहते हैं जिनकी सोच को सलाम है पर इनकी गुहार सुनने वाला कोई भी नहीं है।

मांग पूरी नही हुई तो आंदोलन की चेतावनी

सफाई कर्मचारियों ने कई बार नगर निगम के आला अफसरों से मिन्नते की,लेकिन वर्तमान समय तक इस ओर कोई भी सकारात्मक परिणाम सामने नही आया, जिससे नाराज सफाई कर्मी अब आंदोलन की चेतावनी देते हुए काम बंद करने की बात कह रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो याद आने की साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी जिससे स्वच्छ भारत/स्वच्छ छत्तीसगढ़ पर दाग लग सकता है।

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