भारत सम्मान का हल्ला बोल: CM के क्षेत्र में प्रशासन की ढिठाई, ‘भगोरा’ के ग्रामीण कब तक रहेंगे मौत के साये में?

जशपुर/फरसाबहार | विशेष रिपोर्ट: गौरीशंकर भगत
‘भारत सम्मान’ केवल खबरें नहीं छापता, बल्कि जनता के हक की लड़ाई लड़ता है। ग्राम पंचायत भगोरा (जिला जशपुर) के उस जर्जर और जानलेवा लकड़ी के पुल की व्यथा को हमने पहले भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। लेकिन अफ़सोस, कुंभकर्णी नींद सो रहे जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह निवास से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह क्षेत्र आज विकास की बाट जोह रहा है या यूं कहें कि व्यवस्था के भ्रष्टाचार और अनदेखी की बलि चढ़ रहा है।
प्रशासन को ‘भारत सम्मान’ की खुली चुनौती
हमने पहले भी आगाह किया था और आज फिर दिखा रहे हैं कि कैसे 10 गांवों के लोग हर दिन ‘मौत के पुल’ से गुजरते हैं। भारत सम्मान ने ठाना है कि जब तक घोनघोसा-फरसाबहार मार्ग पर पक्की सड़क और पुल का निर्माण शुरू नहीं हो जाता, तब तक हमारी कलम शांत नहीं होगी। ग्रामीणों का अटूट भरोसा ही हमारी ताकत है, और हम उनकी आवाज को दबने नहीं देंगे।

क्यों मौन है जशपुर प्रशासन?
सवाल 1: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी ग्रामीण की मौत का इंतज़ार कर रहा है?
• सवाल 2: मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र में 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाने को मजबूर जनता के टैक्स का पैसा कहाँ जा रहा है?
सवाल 3: पिछली रिपोर्टिंग के बाद भी अब तक धरातल पर कोई सर्वे या काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
जनता का भरोसा, हमारा संकल्प
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब झूठे आश्वासनों से थक चुके हैं। 1 किलोमीटर के उस टुकड़े ने लाखों लोगों की जिंदगी को नरक बना दिया है। भारत सम्मान इस मामले को अब विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और उच्च अधिकारियों तक बार-बार पहुँचाएगा।
“प्रशासन सुन ले, यह खबर तब तक छपेगी, जब तक भगोरा की सड़क पर कोलतार की महक और पुल की मजबूती नहीं दिख जाती। जनता के भरोसे को हम टूटने नहीं देंगे।”
“हम थक चुके हैं प्रशासन को गुहार लगाकर। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही सरकार की नींद खुलेगी? मुख्यमंत्री जी के घर के बगल में अगर यह हाल है, तो प्रदेश के बाकी हिस्सों की कल्पना करना भी डरावना है।” — एक स्थानीय ग्रामीण
यह खबर शासन और प्रशासन के लिए एक खुली चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे इन ग्रामीणों का धैर्य कभी भी जवाब दे सकता है। भगोरा के ग्रामीण आज भी उस ‘पक्के पुल’ की बाट जोह रहे हैं, जो उनके सफर को सुरक्षित बना सके।
पूर्व की खबर पर एक नज़र…
https://youtu.be/S8f_Shivy40?si=ypuaFZwSLzmUpYWP




