सोनहत में गूँजी ‘हुंकार’: जन-समस्याओं के समाधान के लिए कोरिया जन सहयोग समिति का ऐलान-ए-जंग, एसडीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

कोरिया । बैकुंठपुर । सब्बीर मोमिन
सोनहत क्षेत्र की बदहाल बुनियादी व्यवस्था, वर्षों से लंबित जनहित मांगों और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ कोरिया जन सहयोग समिति ने बुधवार को खुला मोर्चा खोल दिया।
‘हुंकार’ नाम से शुरू किए गए इस महा-अभियान के तहत सैकड़ों ग्रामीणों ने जनसभा कर अपनी समस्याएं खुलकर रखीं और मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
यह जनसभा न केवल शिकायतों का मंच बनी, बल्कि क्षेत्र की उपेक्षा के खिलाफ जनता की सामूहिक चेतावनी भी साबित हुई—अब अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनसभा में उमड़ा जन-सैलाब, क्षेत्र की हर पीड़ा हुई मुखर
सोनहत में आयोजित इस जनसभा में दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, मितानिन बहनें, युवा, पत्रकार, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचे।
सभा स्थल पर एक-एक कर लोगों ने बिजली, सड़क, नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन अधिकार और राशन जैसी बुनियादी समस्याएं सामने रखीं।
ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से ज्ञापन, आवेदन और आश्वासन मिलते रहे, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली।
अंधेरे और डिजिटल दूरी के खिलाफ हुंकार
जन सहयोग समिति ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि—
नावटोला, कचोहर और चंदहा जैसे गांव आज भी अंधेरे में जी रहे हैं, जहां विद्युतीकरण वर्षों से अधूरा है। रामगढ़ और मेण्ड्रा क्षेत्र मोबाइल नेटवर्क से वंचित हैं, जिससे छात्र-युवा और आपात सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सोनहत, सलगवां और कैलाशपुर-कुशमाहा में खराब पड़ी रोड लाइटें दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं।
सड़कों और पुलों की बदहाली पर फूटा गुस्सा
ज्ञापन में क्षेत्र की जर्जर सड़कों और टूटे पुलों को ग्रामीण जीवन की सबसे बड़ी बाधा बताया गया।
प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
रामगढ़-कोटाडोल (27 किमी) पक्की सड़क का तत्काल निर्माण मेण्ड्रा से अमहर तक नए मार्ग की स्वीकृति तहसील कार्यालय और नवीन कॉलेज तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत गिधेर और सेमरिया में टूटे पुलों का नव-निर्माण
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सड़कों की बदहाली सीधे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्रभावित कर रही है।
सामाजिक न्याय, पंडो जनजाति और मितानिनों की आवाज
सभा में सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठे—
पंडो जनजाति के लिए विशेष शिविर लगाकर जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएं नक्शे से छूटे लोलकी और उरांव पारा को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए मितानिन एमटी, समन्वयकों का लंबित मानदेय तत्काल भुगतान सोनहत में निर्मित मितानिन भवन शीघ्र हैंडओवर किया जाए
वन अधिकार और जन-सुविधाओं की मांग
समिति ने स्पष्ट किया कि—
वन अधिकार पात्र हितग्राहियों के मकानों को अतिक्रमण बताकर न गिराया जाए उन्हें शीघ्र वन अधिकार पट्टा दिया जाए कांटो, केवराबहरा और कुर्थी गांवों में अतिरिक्त राशन दुकानें खोली जाएं ताकि ग्रामीणों को दूर न जाना पड़े
नेतृत्व की दो-टूक चेतावनी, पुष्पेंद्र राजवाड़े (अध्यक्ष)
“‘हुंकार’ का मतलब है सोई हुई व्यवस्था को जगाना। बिजली, सड़क और पानी कोई खैरात नहीं—यह हमारा अधिकार है। जब तक हर गांव तक विकास नहीं पहुंचेगा, संघर्ष जारी रहेगा।”
अधिवक्ता जयचंद सोनपाकर (कार्यकारी अध्यक्ष)
“लोलकी और उरांव पारा जैसे गांवों का नक्शे से बाहर होना प्रशासनिक विफलता है। जरूरत पड़ी तो हम कानूनी और सड़क—दोनों लड़ाई लड़ेंगे।”
रजा अली अंसारी (वरिष्ठ कानूनी सलाहकार)
“पंडो जनजाति के अधिकारों में देरी संवैधानिक उल्लंघन है। विशेष शिविर लगाकर प्रशासन को समाधान करना होगा।”
कृष्णा सिंह बाबा (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ)
“मितानिन बहनों का मानदेय रोकना अमानवीय है। पत्रकार समाज इस हुंकार को शासन की चौखट तक ले जाएगा।”
एस.के. रूप (संपादक)
“अगर इस बार पंडो जनजाति का जाति प्रमाण पत्र नहीं बना, तो मामला हाईकोर्ट तक जाएगा।”
राजू साहू (उपाध्यक्ष)
“नेटवर्क और राशन की समस्या ने ग्रामीण जीवन को पंगु बना दिया है। समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।”
प्रशासन का आश्वासन
सभा स्थल पर प्रशासन की ओर से तहसीलदार सोनहत संजय राठौर पहुंचे। उन्होंने समिति से ज्ञापन प्राप्त किया और कई समस्याओं को जायज मानते हुए उनके शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया।
तहसीलदार ने शेष मांगों को शासन स्तर पर भेजने की बात कही।
राजनीति से ऊपर जन-हुंकार
इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि—
यह भीड़ किसी राजनीतिक दल के झंडे तले नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान की मांग को लेकर स्वतःस्फूर्त रूप से उमड़ी।
क्षेत्र के बुजुर्गों और जानकारों के अनुसार, सोनहत में गैर-राजनीतिक मंच पर इतनी बड़ी भीड़ पहली बार देखी गई—जो इस बात का संकेत है कि अब जनता केवल आश्वासन नहीं, नतीजे चाहती है।



