सुरजपुर

भैयाथान CHC में एक्स-रे सेवा ठप: 2018 में लगी मशीन बेकार,गप्पबाज़ रेडियोग्राफर की मनमानी से मरीज बेहाल

भारत सम्मान/सूरजपुर/फिरोज खान– छत्तीसगढ़ सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लाख दावे करे, लेकिन भैयाथान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां 2018 में लगाई गई पोर्टेबल एक्स-रे मशीन लगभग बेकार साबित हो रही है, क्योंकि रेडियोग्राफर की लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण के चलते यह सेवा अब लगभग बंद पड़ी है।

छह साल से मशीन,लेकिन सेवा नदारद।

भैयाथान CHC में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन वर्ष 2018 में स्थापित की गई थी ताकि ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को समय पर एक्स-रे जांच उपलब्ध हो सके। लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी इस सुविधा का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। मशीन तो है, पर ऑपरेटर की मनमानी के कारण उसका उपयोग नहीं हो रहा।

हमेशा बंद रहता एक्स-रे रूम, मरीज दर-दर की ठोकरें खाते

स्वास्थ्य केंद्र में स्थित एक्स-रे कक्ष अक्सर ताले में जकड़ा रहता है। मरीज इलाज के लिए आते हैं लेकिन ताला देख मायूस लौट जाते हैं। रेडियोग्राफर राकेश जायसवाल अकसर ऑफिस में BMO डॉ. राकेश सिंह के साथ गप्पें मारते दिखते हैं। आरोप है कि उनकी राजनीतिक पहुंच इतनी मजबूत है कि कोई उन्हें चुनौती देने की हिम्मत नहीं करता।

सेवा नहीं, सिफारिश और संरक्षण का खेल।

सूत्रों के अनुसार, राकेश जायसवाल की ड्यूटी जहां भी लगती है, वहां एक्स-रे सेवा लगभग ठप हो जाती है। मरीजों को मजबूरी में सूरजपुर जिला अस्पताल या महंगे निजी लैब्स जाना पड़ता है, जिससे गरीबों की जेब पर ₹300-₹400 का अनावश्यक बोझ पड़ता है।

टीबी मरीज हो रहे सबसे ज्यादा प्रभावित।

भैयाथान CHC में प्रतिदिन बड़ी संख्या में टीबी के मरीज आते हैं, जिनके लिए बलगम जांच के साथ एक्स-रे भी अनिवार्य होता है। लेकिन एक्स-रे न होने से न केवल इलाज में देरी हो रही है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।

सरकारी योजनाओं को लग रहा झटका।

छत्तीसगढ़ सरकार की  जनसेवा से जुड़ी योजनाएं ऐसे गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों के कारण दम तोड़ रही हैं। लाखों रुपये की लागत से लाई गई मशीन और करोड़ों के बजट के बावजूद ग्रामीण जनता अब भी उपचार के लिए तरस रही है।

राजनीतिक संरक्षण बना मनमानी की ढाल।

सूत्रों की मानें तो राकेश जायसवाल को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के करीबी रिश्तेदारों का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसकी आड़ में वह ड्यूटी से गायब रहना, अनुशासनहीनता और मरीजों की उपेक्षा जैसे कृत्य बेरोकटोक कर पा रहे हैं।

प्रशासन की परीक्षा: कार्रवाई होगी या लापरवाही जारी रहेगी?

अब यह देखना होगा कि क्या इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन कोई कठोर कदम उठाएगा या फिर सरकारी सिस्टम इन राजनीतिक संरक्षित कर्मचारियों के आगे फिर एक बार नतमस्तक हो जाएगा?

बयान

विकासखंड स्वास्थ्य अधिकारी राकेश सिंह के द्वारा बताया गया कि पिछले 15 दिनों से एक्सरे मशीन खराब है जिसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई, इंजीनियरों के आने के बाद पुनः चालू हो जाएगी।

Bharat Samman

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