बना तो शौचालय, पर उपयोग शून्य: करंजवार में लाखों खर्च के बाद भी ताले में बंद सुविधा

भारत सम्मान | सूरजपुर | युसूफ मोमिन
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों को स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत करंजवार में बने सामुदायिक शौचालय की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है, जहां लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यह सुविधा आज तक ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ सकी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत करंजवार में 5 जनवरी 2023 को शुरू हुआ सामुदायिक शौचालय निर्माण कार्य 4 जून 2024 को पूरा हुआ। करीब साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से बनाए गए इस शौचालय में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग कक्ष तैयार किए गए हैं। दीवारों पर स्वच्छता से जुड़े आकर्षक चित्र भी बनाए गए हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इस शौचालय के दोनों कक्षों पर आज भी ताले लटक रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय बनने के बाद से अब तक इसे एक बार भी उपयोग में नहीं लाया जा सका है। इसकी सबसे बड़ी वजह पानी की व्यवस्था का अभाव बताया जा रहा है। शौचालय की छत पर पानी की टंकी तो लगाई गई है, लेकिन उसमें पानी पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। न तो पाइपलाइन की सुविधा है और न ही किसी अन्य माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
खुले में शौच जाने को मजबूर ग्रामीण
सामुदायिक शौचालय के उपयोग में नहीं आने के कारण गांव के लोगों को आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि इससे पहले भी जनपद पंचायत प्रतापपुर की ग्राम पंचायत झींगादोहर में बने सामुदायिक शौचालय में ताला लगे रहने का मामला सामने आ चुका है। अब करंजवार से भी इसी तरह की स्थिति सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
निर्माण का पूरा भुगतान, फिर भी सुविधा अधूरी
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत करंजवार में बने इस सामुदायिक शौचालय के निर्माण कार्य का पूरा भुगतान पंचायत को मिल चुका है। इसके बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। पानी जैसी मूलभूत व्यवस्था नहीं होने के कारण यह शौचालय करीब पौने दो साल से अनुपयोगी बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही पानी की व्यवस्था कर शौचालय को चालू नहीं किया गया तो स्वच्छ भारत मिशन की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या फिर यह शौचालय यूं ही ताले में बंद रहकर सरकारी योजनाओं की हकीकत बयान करता रहेगा।



