शराब प्रेमियों के लिए खुशखबरी! वरिष्ठ पत्रकार की शिकायत पर जागा विभाग
बार-रेस्टोरेंट में पैग के नाम पर कहीं कम तो नहीं मिल रही शराब? विधिक मापविज्ञान विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

रायपुर/अम्बिकापुर । विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में बार और रेस्टोरेंट में शराब परोसने की व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार जायसवाल, भारत सम्मान न्यूज, द्वारा राज्य के विभिन्न बार एवं रेस्टोरेंट में शराब परोसने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पैग मेजर यानी माप उपकरणों के सत्यापन और मुद्रांकन को लेकर शिकायत किए जाने के बाद आखिरकार विधिक मापविज्ञान विभाग छत्तीसगढ़ हरकत में आया है।
मामले में विभाग के नियंत्रक कार्यालय ने प्रदेश के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए बार एवं रेस्टोरेंट का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करने, वहां इस्तेमाल किए जा रहे सभी पैग मेजर की जांच करने तथा नियमानुसार उनका सत्यापन एवं मुद्रांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत में उठाया गया था बड़ा सवाल
वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार जायसवाल ने 2 अप्रैल 2026 को विधिक मापविज्ञान विभाग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत का विषय ही यह था कि छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न बार एवं रेस्टोरेंट में शराब परोसने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पैग मेजर का विधिक मापविज्ञान विभाग द्वारा नियमित सत्यापन एवं मुद्रांकन नहीं किया जा रहा है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को प्रदेश के सभी बार एवं रेस्टोरेंट की जांच करने के निर्देश जारी किए।
विभाग को क्यों करना पड़ा विशेष अभियान?
विभागीय पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शिकायत में यह आरोप सामने आया था कि राज्य के विभिन्न बार एवं रेस्टोरेंट में उपयोग किए जा रहे पैग मेजर उपकरणों का विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 एवं संबंधित नियमों के अनुसार नियमित सत्यापन और मुद्रांकन नहीं किया जा रहा है।
यानी सवाल केवल शराब पीने वालों का नहीं, बल्कि माप की शुद्धता और उपभोक्ता को निर्धारित मात्रा मिलने से भी जुड़ा हुआ है।
अगर किसी ग्राहक से एक निश्चित मात्रा के शराब के पैसे लिए जा रहे हैं, तो उसके गिलास में वास्तव में उतनी ही मात्रा पहुंच रही है या नहीं—इसकी निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब हर बार-रेस्टोरेंट की जांच के निर्देश
नियंत्रक, विधिक मापविज्ञान, छत्तीसगढ़ के कार्यालय से जारी निर्देश में सभी सहायक नियंत्रकों एवं निरीक्षकों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में संचालित समस्त बार एवं रेस्टोरेंट का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण करने को कहा गया है।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि उपयोग में लाए जा रहे सभी पैग मेजर का तत्काल सत्यापन एवं मुद्रांकन सुनिश्चित किया जाए।
यदि किसी प्रतिष्ठान में पैग मेजर निर्धारित मानकों के अनुरूप सत्यापित नहीं पाया जाता है, तो संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सात दिन में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग ने संबंधित अधिकारियों को की गई कार्रवाई और पैग मेजर के सत्यापन का प्रतिवेदन सात दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया था।
इससे सवाल यह भी उठता है कि क्या शिकायत आने से पहले विभाग द्वारा प्रदेश के बार एवं रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पैग मेजर की नियमित जांच वास्तव में प्रभावी तरीके से की जा रही थी?
यदि नियमित निरीक्षण और सत्यापन की व्यवस्था पहले से पूरी तरह सक्रिय थी, तो ऐसी शिकायत की नौबत क्यों आई—यह सवाल विभागीय कार्यप्रणाली पर भी विचार की मांग करता है।
शराब प्रेमियों के लिए क्यों है यह खबर अहम?
बार में शराब खरीदने वाला ग्राहक आमतौर पर यह नहीं देख सकता कि उसके गिलास में डाली गई शराब की मात्रा वास्तव में कितनी है। वह पैग मेजर पर निर्भर रहता है।
ऐसे में पैग मेजर का सही माप का होना और उसका निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापित एवं मुद्रांकित होना उपभोक्ता हित से सीधे जुड़ा विषय है।
अब यदि विभाग वास्तव में पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर पैग मेजर की जांच करता है, तो इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि कितने प्रतिष्ठानों में माप उपकरण नियमों के अनुरूप हैं और कितने स्थानों पर सुधार अथवा कार्रवाई की आवश्यकता है।
कागजी आदेश से आगे बढ़ेगा विभाग या फिर मामला फाइलों में?
हालांकि विभाग ने कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन असली सवाल अब मैदानी कार्रवाई का है।
प्रदेशभर के बार और रेस्टोरेंट की जांच के आदेश जारी होना पहला कदम है। इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय अधिकारी वास्तव में कितने प्रतिष्ठानों तक पहुंचते हैं, कितने पैग मेजर की जांच होती है, कितने उपकरण सत्यापित पाए जाते हैं और कितने मामलों में कार्रवाई की जाती है।
साथ ही यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि सात दिनों में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट में अधिकारियों ने क्या जानकारी दी।
शिकायतकर्ता को RTI के माध्यम से मिली कार्रवाई की जानकारी
इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार जायसवाल द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत विभाग से कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई थी।
विधिक मापविज्ञान विभाग के जनसूचना अधिकारी द्वारा 25 अगस्त 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि शिकायत पर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित सूचना की सत्यापित छायाप्रति भेजी जा रही है।
इस तरह शिकायत से लेकर विभागीय निर्देश और उसके बाद RTI के माध्यम से कार्रवाई की जानकारी सामने आने तक पूरा घटनाक्रम अब सार्वजनिक दस्तावेजों का हिस्सा बन गया है।
विभाग से अब जनता के सवाल
अब निगाहें विधिक मापविज्ञान विभाग पर हैं। सवाल यह है कि—
क्या प्रदेश के सभी बार और रेस्टोरेंट की जांच वास्तव में हुई?
कितने पैग मेजर सत्यापित और मुद्रांकित पाए गए?
कितने प्रतिष्ठानों में अनियमितता मिली?
कितने मामलों में कार्रवाई की गई?
और सात दिनों में मांगी गई रिपोर्ट में विभाग को क्या-क्या जानकारी प्राप्त हुई?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि विभाग का यह अभियान महज कागजी आदेश तक सीमित रहा या वास्तव में प्रदेश के बार-रेस्टोरेंट में माप व्यवस्था को लेकर ठोस कार्रवाई हुई।
फिलहाल इतना जरूर है कि एक पत्रकार की शिकायत ने प्रदेशभर के बार एवं रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पैग मेजर की जांच को लेकर विभागीय तंत्र को सक्रिय कर दिया है। अब देखना होगा कि विभाग अपने ही जारी निर्देशों को जमीन पर कितनी गंभीरता से लागू करता है।



