हर्षोल्लास के साथ मनाया गया छठ महापर्व,व्रतियों ने की सुख समृद्धि की कामना

भारत सम्मान/सूरजपुर/युसूफ मोमिन:- प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रतापपुर के भैसामुण्डा में प्रवाहित महान नदी में में लोक आस्था एवं महाउपासना के महापर्व छठ पूजा सम्पन की गई जिसमें क्षेत्र के समस्त श्रद्धांलुओं ने छठी माता की पूजा कर इस पावन पर्व के अवसर पर श्रद्धांलु संध्या काल में डूबते सूर्य को अर्ध्य देकर परिवार की सुख समृद्धि, संतान की रक्षा एवं संतान प्राप्ति की कामना की गई छठ महापर्व में मुख्य आकर्षण सांध्यअर्घ्य है। सांध्यकाल में व्रती माताएँ जल में खड़े होकर सूर्यदेव को सांध्य अर्घ्य अर्पित करते हैं मान्यता है कि सूर्यदेव और छठी मैया को अर्घ्य देने से व्रतियों के घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। कई परिवारों में संतान प्राप्ति की कामना से भी इस महाउपासना के महापर्व का पालन किया जाता हैं।

श्रद्धांलु छठी मैया से विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर इस महापर्व में सूर्यदेव के साथ छठी मैया की भी पूजा की गई व्रती माताएँ छठी माता से परिवार में सुख-शांति और बच्चों की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा करते हैं छठ महापर्व में प्रभात काल में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस पावन पर्व का समापन हुआ इस महापर्व में आस्था, कठिन तप और परिवार की भलाई की कामना का संगम देखने को मिलता है,जिसमे भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण महाउपसना का झलक दिखाई देता हैं।

किन्तु लगभग पचास वर्ष पूर्व से लेकर वर्तमान समय तक क्षेत्र के व्रती एवं श्रद्धांलु दुर्गम एवं जटिल रास्तों से चलकर इस इस पर्व में शामिल होते आ रहें हैं जिनको छठ घाट पूजा स्थल में पहुंचने में भारी मशक्कतों का सामना करना पड़ता हैं। ज्ञात हों की भैसामुण्डा ग्राम पंचायत केवरा के अंतर्गत आता हैं जिसमें लगभग पचास वर्ष पूर्व से लेकर वर्तमान समय तक छठ घाट,लाइटिंग व्यवस्था,छठ घाट पूजा स्थल तक पहुँच मार्ग की व्यवस्था करने में ग्राम पंचायत नाकाम रहा वहीं स्थानीय लोगो एवं वार्ड पंच के द्वारा बार बार ग्राम पंचायत का इस ओर ध्यानाकर्षण कराया गया किन्तु पंचायत के द्वारा अपने ही एक वार्ड को मुलभुत सुविधाओं से वंचित रखा गया जो छठी माता की व्रतीयाँ अपने घर परिवार के साथ साथ बिना भेद भाव के पुरे देश की सुख समृद्धि के लिये कामना करतीं हैं उन्ही माताओं बहनो को कठिनाइयों भरे दुर्गम रास्ते से होकर गुजरना पड़ता हैं जिससे पंचायत की लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता हैं।




