सुरजपुर

बरौधी ग्राम सभा में सुशासन की खुली पोल: विशेष ग्राम सभा में अधिकांश अधिकारी नदारद,ग्रामीणों में आक्रोश

प्रशासनिक आदेशों की उड़ती धज्जियाँ, जवाबदेही शून्य।

भारत सम्मान/सूरजपुर/फिरोज खान:- जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत बरौधी में 9 मई को आयोजित विशेष ग्राम सभा शासन के तमाम निर्देशों के बावजूद मज़ाक बनकर रह गई। प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी, अधिकारियों की गैरहाज़िरी और जनता की उपेक्षा ने सुशासन की ज़मीनी हकीकत उजागर कर दी।

कलेक्टर एस. जयवर्धन द्वारा 2 मई को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन हेतु आदेश जारी किया गया था। यह आदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 129 (ख)(3) के तहत प्रभावी किया गया था, जिसमें सरपंच, सचिव और सभी विभागीय अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति तय की गई थी।

लेकिन जब 9 मई को ग्राम पंचायत बरौधी में यह सभा आयोजित हुई, तो उसमें लोकतंत्र का उपहास होते हुए साफ देखा गया। सभा में मात्र सरपंच विनोद किंडो, सचिव कवल साय पैकरा और प्रभारी अधिकारी ईमिल बरवा (कृषि विस्तार अधिकारी) ही उपस्थित थे।नदारद थे तमाम ज़िम्मेदार अधिकारी।

नदारद थे तमाम ज़िम्मेदार अधिकारी।

जो विभागीय प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से उपस्थित होने चाहिए थे — पटवारी, रोजगार सहायक, प्राथमिक व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, कोटवार, वन रक्षक — उनमें से कोई भी सभा में नहीं पहुंचा।तालाबंद अस्पताल, खाली कुर्सियाँ और सन्नाटा

तालाबंद अस्पताल, खाली कुर्सियाँ और सन्नाटा

सभा के दौरान उपस्वास्थ्य केंद्र के बाहर ताला लटकता मिला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित स्वास्थ्यकर्मी भी उपस्थित नहीं थे। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है — जब निर्णय लेने की सबसे महत्वपूर्ण इकाई, ग्राम सभा में ही विभागीय जवाबदेही गायब है, तो किलकारी योजना, शौचालय निर्माण, जाति प्रमाण पत्र स्वीकृति जैसे मुद्दों पर निर्णय कैसे होंगे?

ग्रामसभा प्रभारी ने खुद उठाए सवाल

ईमिल बरवा, जो विशेष ग्राम सभा के प्रभारी अधिकारी थे, ने भी खुले तौर पर कहा: मेरी ड्यूटी ग्राम सभा प्रभारी के रूप में लगी थी। संबंधित सभी विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य थी, फिर भी किसी ने आना उचित नहीं समझा। यह गंभीर लापरवाही है और इसकी जांच कर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।गांव वालों का फूटा ग़ुस्सा।

गांव वालों का फूटा ग़ुस्सा।

ग्रामवासियों में इस उपेक्षा को लेकर तीव्र नाराज़गी देखी गई। एक ग्रामीण ने कहा,हम तो उम्मीद लेकर आते हैं कि हमारी समस्याएं सुनी जाएंगी, लेकिन जब कोई अधिकारी आए ही नहीं, तो फिर इस सभा का क्या मतलब?

क्या केवल कागज़ों में होगा “ग्राम स्वराज?

ग्राम सभा का यह हाल उस सोच को कठघरे में खड़ा करता है, जिसमें पंचायतों को लोकतंत्र की जड़ कहा जाता है। जब अधिकारी ही जनता की बात सुनने को मौजूद नहीं होंगे, तो ग्राम सभा जैसे मंच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब यह देखना अहम होगा कि इस लापरवाही पर प्रशासन क्या कार्यवाही करता है। क्या कलेक्टर एस. जयवर्धन इस आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेंगे या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दफ़न हो जाएगा?

निष्कर्ष…

ग्राम पंचायत बरौधी की विशेष ग्राम सभा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाएगा, तब तक ग्राम सभाओं का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। शासन को चाहिए कि ऐसे प्रकरणों में दोषी अधिकारियों पर तत्काल विभागीय जांच कर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि प्रशासनिक गंभीरता कायम रहे और जनता का विश्वास लोकतंत्र में बना रहे।

Bharat Samman

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