सुरजपुर

प्रधानमंत्री आवास योजना की जमीनी सच्चाई: लाभार्थी अब भी इंतजार में,जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?

भारत सम्मान/सूरजपुर/युसूफ मोमिन-प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य देश के हर गरीब परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराना था, ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें। लेकिन प्रतापपुर ब्लॉक की हकीकत इस वादे से बिल्कुल उलट है। यहाँ दर्जनों गरीब परिवार आज भी अपने अधूरे सपनों और जर्जर घरों में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रतापपुर ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन वास्तविक निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। कई लाभार्थियों को पहली किस्त की राशि मिलने के बाद दूसरी किस्त अब तक जारी नहीं की गई। परिणामस्वरूप दर्जनों मकान अधूरे खड़े हैं – कहीं दीवारें बनी हैं लेकिन छत नहीं, तो कहीं नींव तक का काम रुक चुका है।

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि पंचायत स्तर पर फाइलों में काम पूरे दिखाकर उच्च अधिकारियों को झूठे आँकड़े भेज दिए जाते हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। इससे न केवल योजना की मूल भावना प्रभावित हो रही है बल्कि गरीब परिवारों का भरोसा भी टूट रहा है। गांव के एक बुजुर्ग लाभार्थी ने आक्रोश जताते हुए कहा – “हमें कागज पर मकान मिल चुका है, लेकिन असलियत में अभी तक एक ईंट भी नहीं रखी गई। अधिकारी हमारी सुनवाई ही नहीं करते।” वहीं ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक गरीब परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि प्रभावशाली और सक्षम लोगों के नाम शामिल कर दिए गए। इससे योजना की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और लापरवाही बरतने वाले सरपंच व सचिव पर कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही अधूरे मकानों का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि योजनाएँ चाहे कितनी ही अच्छी नीयत से क्यों न बनाई जाएँ, जब तक स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका असली लाभ पात्र जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच पाता।

Bharat Samman

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