सुरजपुर

एक ही नाले पर तीन पुलिया: विकास की राह या भ्रष्टाचार का पुल?

भारत सम्मान/सूरजपुर/फिरोज खान:- जिले के जनपद पंचायत ओडगी अंतर्गत केसर ग्राम पंचायत में केवल एक किलोमीटर की दूरी में एक ही नाले पर तीन पुलिया! यह कोई मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है। ओड़गी ब्लॉक मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत केसर में ऐसा मामला सामने आया है जो न सिर्फ प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों की साठगांठ को भी उजागर करता है।

दो पुलिया से हो रहा आवागमन,तीसरी किसलिए?

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पहले से ही दो पुलिया मौजूद हैं और आवागमन पूरी तरह संभव है। ऐसे में तीसरी पुलिया निर्माण की मंजूरी देना हैरान करता है। आश्चर्य की बात यह है कि जहां वास्तव में पुलिया की आवश्यकता है- जैसे कि लाटा घाट नाला, वहां कोई काम नहीं हो रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यह काम न तो आवश्यकता पर आधारित है और न ही जनहित में।

मीडिया के सामने खुली पोल

जब मीडिया की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया, तो ठेकेदार संजय जायसवाल द्वारा बताए गए ‘आवागमन मार्ग’ की सच्चाई सामने आ गई। कुछ दूरी चलने के बाद रास्ता ही खत्म हो गया। ऐसे में यह पुलिया किस काम की? ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया- क्या यह विकास है या केवल जेब भरने का खेल?

संजय जायसवाल का राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड

ठेकेदार संजय जायसवाल का नाम पहले भी ऐसे ही निर्माण कार्यों में आया है, जहाँ पुलिया तो बनी पर रास्ता कहीं नहीं गया। सूत्रों की मानें तो जायसवाल पहले कांग्रेस में कार्यकारिणी सदस्य रहे और भाजपा शासन आने पर बीजेपी का दामन थाम लिया, ताकि ठेकेदारी का सिलसिला बिना रुकावट चलता रहे। अब केवल कुछ वर्षों में ही 19 लाख रुपये की लागत से काम शुरू हो चुका है।

बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी नाराज़।

ग्राम के बुजुर्ग और वर्षों से भाजपा में सक्रिय कार्यकर्ता कहते हैं कि हमें 50 साल हो गए पार्टी में, लेकिन आज तक ऐसा काम नहीं देखा। यह विकास नहीं, पार्टी के नाम पर विनाश है। स्थानीय भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कालीचरण काशी ने भी निर्माण को अनावश्यक बताया और कहा कि इससे ज़्यादा ज़रूरत लाटा घाट नाले में थी, जहाँ आज भी ट्रैक्टर और एंबुलेंस नहीं पहुँच पाते।

प्रशासन और शासन से सवाल।

क्या इस पुलिया निर्माण की स्वीकृति प्रक्रिया पारदर्शी थी?, क्या जनहित और प्राथमिकता के आधार पर यह कार्य तय किया गया?

करोड़ों की सरकारी योजनाएं इस तरह की अनियमितताओं की भेंट चढ़ती रहीं तो जनता तक उनका लाभ कैसे पहुंचेगा?

केसर पंचायत का यह मामला केवल एक पुलिया का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की नियत और नीतियों की परीक्षा है। यदि इस प्रकार के कार्यों को बिना समीक्षा के अनुमति मिलती रही तो विकास की परिभाषा केवल ‘कागजों’ और जेबों तक सीमित रह जाएगी।

ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले की जांच हो, और पुलिया निर्माण वहीं हो जहाँ वास्तविक ज़रूरत हो- ना कि वहाँ जहाँ केवल राजनीतिक समीकरण और ठेकेदारी का लाभ छिपा हो। कार्य स्थल पर जनपद पंचायत की एक टीम भेजी गई निरीक्षण के लिए जहां टिम के द्वारा फिलहाल काम को रुकवा दिया गया है वही टीम के द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा तथ्यों के आधार पर।

नीलेश सोनी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत ओडगी, जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़।

Bharat Samman

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