कोरबा जिले के कोरबी स्कूल का भवन 3 साल से जर्जर, 80 हजार की राशि से नहीं हो पा रही मरम्मत
बारिश में टपकती छत, पढ़ाई बाधित, जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट बनाने की मांग

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा । भारत सम्मान । दीपक महंत
विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के शास. पूर्व मा. शा. कोरबी (सिंधिया) का स्कूल भवन पिछले 3 सालों से जर्जर हालत में है। बारिश के दिनों में कक्षाओं और कार्यालय में पानी टपकने से पढ़ाई ठप हो जाती है। विभाग से 80,000 रुपये की मरम्मत राशि स्वीकृत भी हुई, लेकिन वह राशि नाकाफी बताकर काम शुरू नहीं हो सका। अब स्कूल प्रबंधन ने जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट बनवाने की मांग की है।
2023 से लगातार आग्रह पत्र
स्कूल प्रबंधन समिति और प्रधान पाठक ने सबसे पहले 12 अगस्त 2023 को ग्राम पंचायत कोरबी के सरपंच को पत्र लिखकर छत, शौचालय और विद्युत व्यवस्था ठीक कराने का आग्रह किया था। पत्र में कहा गया था कि छत से पानी टपकने के कारण बच्चों की पढ़ाई में लगातार व्यवधान आ रहा है।
80 हजार स्वीकृत, पर काम संभव नहीं
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 11 अगस्त 2025 को आदेश जारी कर भवन के अति आवश्यक मरम्मत हेतु 80,000 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इस राशि से 3 कक्षाओं, 1 कार्यालय, 1 बरामदे की छत मरम्मत, 15 खिड़कियों की मरम्मत, प्लास्टर और रंगाई-पुताई का प्रस्ताव था।
लेकिन 12 फरवरी 2026 को मौके पर पहुंचे अभियंता ने स्पष्ट कर दिया कि इतनी कम राशि में छत का मरम्मत कार्य संभव नहीं है। इसके बाद 13 फरवरी 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया कि 80,000 रुपये की राशि वापस लेकर पूरे भवन के जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट तैयार कराया जाए।
जर्जर भवन से सुरक्षा का खतरा
4 नवंबर 2025 को बीईओ को भेजे गए एक अन्य पत्र में प्रधान पाठक ने बताया कि स्कूल के मुख्य भवन की छत, दीवारें और खिड़कियां पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। इससे कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।
स्कूल में कक्षा 3, कार्यालय और बरामदे की छत के अलावा खिड़की-दरवाजों की मरम्मत और रंगाई-पुताई भी लंबित है। भवन का नक्शा भी विभाग को सौंपा जा चुका है।
अब क्या चाहते हैं स्कूल वाले
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि टुकड़ों में मरम्मत से समस्या हल नहीं होगी। बरसात से पहले पूरे भवन का जीर्णोद्धार जरूरी है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ाई कराई जा सके।
अब देखना होगा कि विभाग इस समस्या को लेकर क्या दिशा निर्देश तय करती है।



