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पटपरा पंचायत में सरपंच पति का दबदबा, बिना अधिकार देख रहे निर्माण और PDS का काम

पंचायती राज कानून में "सरपंच पति" नाम का कोई पद या अधिकार नहीं है। फिर भी सरपंच पति संभाल रहे बागडोर

कोरबा/पाली । भारत सम्मान । दीपक महंत

पाली जनपद अंतर्गत के ग्राम पंचायत पटपरा में निर्वाचित सरपंच के बजाय उनके पति द्वारा पंचायत के सभी कामकाज देखे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरपंच पति बिना किसी अनुमति और अधिकार के पंचायत के निर्माण कार्यों की देखरेख के साथ-साथ PDS का संचालन भी कर रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी और पत्रकारों द्वारा किए गए समाचार संकलन के दौरान सरपंच पति को ग्रामीणों को राशन वितरण करते भी देखा गया।

इस संबंध में जब सरपंच और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के सारे काम सरपंच पति के द्वारा ही किए जाते हैं। आगे जानकारी लेने पर पता चला कि वास्तविक सरपंच घर का काम संभालती हैं, जबकि पंचायत की पूरी बागडोर सरपंच के पति के हाथों में है।

पत्रकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने उठाया मुद्दा

इस मामले को लेकर पत्रकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पार्थों चक्रवर्ती अपनी टीम के साथ जनपद सीईओ मनीष देवांगन से फोन पर बात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। सीईओ मनीष देवांगन ने इस संबंध में एसडीएम साहब से बात करने की सलाह दिया ।

इस विषय को लेकर विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम के पाली गेस्ट हाउस स्थित बैठक कार्यक्रम के दौरान संघ के प्रदेश अध्यक्ष पार्थों चक्रवर्ती ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से सरपंच पति ग्राम पंचायत पटपरा के कार्यों के संबंध में बताया गया तो उन्होंने जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है ।

कानूनी प्रावधान

पंचायती राज अधिनियम के अनुसार पंचायत के समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार केवल निर्वाचित सरपंच को होते हैं। सरपंच पति का कोई संवैधानिक पद नहीं होता। ऐसे में बिना प्रस्ताव और अधिकार के निर्माण कार्य देखना और PDS संचालित करना नियम विरुद्ध है।

कानून क्या कहता है

अधिकार सिर्फ निर्वाचित सरपंच के पास, भारतीय संविधान के 73वें संशोधन और मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत वही व्यक्ति सरपंच माना जाएगा जिसने चुनाव जीता और शपथ ली है। चाहे सरपंच महिला हो या पुरुष, सारे अधिकार, हस्ताक्षर, बैठक, फाइल, चेक वही करेगी।

पति को कोई सरकारी अधिकार नहीं

– सरपंच पति किसी दस्तावेज, चेक, प्रस्ताव या फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता
– ग्राम पंचायत की बैठक में बैठना या फैसला लेना भी उसका अधिकार नहीं है
– किसी रिश्तेदार या पति को महिला सरपंच की जगह बैठक में भेजने की अनुमति नहीं है

फिर “सरपंच पति” शब्द क्यों सुनते हैं?

गांवों में जब सीट महिला के लिए आरक्षित होती है तो कई बार चुनाव प्रचार और पंचायत का काम पति संभाल लेते हैं। इसे ही लोग “सरपंच पति” या “प्रॉक्सी” कहते हैं।
लेकिन यह पूरी तरह *अनौपचारिक और गैरकानूनी* माना जाता है।

सरकार का रुख

– छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने आदेश निकाले हैं कि महिला सरपंचों की जगह पति बैठक न लें। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी भी है।
– हरियाणा सूचना आयोग और उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि “सरपंच-पतिवाद” 73वें संविधान संशोधन की भावना के खिलाफ है और महिला सशक्तिकरण को कमजोर करता है।
– केंद्र की कमेटी ने भी सिफारिश की है कि प्रॉक्सी करने वाले पतियों पर सख्त दंड लगे।

पति का कानूनी अधिकार = शून्य

वह सलाह दे सकता है, मदद कर सकता है, लेकिन फैसला, हस्ताक्षर, बैठक, सरकारी काम सिर्फ निर्वाचित सरपंच पत्नी ही करेगी। अगर कोई पति सरपंच बनकर काम करता पाया जाता है तो पंचायत सचिव/CEO शिकायत पर कार्रवाई कर सकते हैं।

Bharat Samman

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