सनौद धान खरीदी केंद्र में बड़ा खुलासा: बिना टोकन 417 कट्टा धान खपाने की कोशिश नाकाम, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने किया विरोध

बालोद/गुरुर । अमित कुमार मंडावी
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर किसान ऑनलाइन टोकन के लिए दिन-रात भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर नियमों को ताक पर रखकर बिना वैध टोकन 417 कट्टा धान को समय से पहले खपाने की योजना का खुलासा हुआ है। मामला सनौद धान खरीदी केंद्र का है, जहां जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष सहित पार्टी कार्यकर्ताओं और जागरूक किसानों ने मौके पर पहुंचकर इस कथित अवैध कार्रवाई पर पानी फेर दिया।
ऑनलाइन टोकन से जूझते किसान, नियमों की अनदेखी
इन दिनों राज्य में धान खरीदी “सांय-सांय” अंदाज में हो रही है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली के कारण कई किसान समय पर धान नहीं बेच पा रहे हैं। खेतों में दिन-रात मेहनत, मौसम की मार, कीट-बीमारी से फसल बचाने के बाद भी किसानों को टोकन कटवाने के लिए नेटवर्क की तलाश में भटकना पड़ता है। ऐसे में बिना टोकन धान खपाने की खबर ने किसानों का आक्रोश भड़का दिया।
417 कट्टा धान पहले से ढेरी कर खपाने की तैयारी
जानकारी के अनुसार, सनौद खरीदी केंद्र में बिना वैध टोकन 417 कट्टा धान ट्राली से लाकर पहले ही ढेरी कर दिया गया था। जैसे ही इसकी भनक जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के क्षेत्रीय सदस्यों और किसानों को लगी, वे तत्काल खरीदी केंद्र पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते माहौल गरमा गया।

प्रशासन मौके पर, जांच शुरू
मामले की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। जांच के लिए राजस्व अनुविभागीय अधिकारी आर.के. सोनकर, तहसीलदार हनुमंत श्याम, नगर पंचायत सीएमओ एवं नोडल अधिकारी गिरीश साहू, सहकारिता विभाग के सीईओ चंद्रकांत चंद्राकर, खाद्य निरीक्षक नरेश पिपरे सहित मंडी कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित कर सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए और वैधानिक कार्रवाई कर आगे की जांच के लिए प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का आरोप
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी, बालोद जिला अध्यक्ष चंद्रभान साहू ने कहा कि—
“जब किसान एक-एक दाना बेचने के लिए ऑनलाइन टोकन का इंतजार कर रहे हैं, तब बिना टोकन धान खपाना किसानों के साथ धोखा है। भाजपा की डबल इंजन सरकार सुशासन दिवस मना रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्राधिकृत अधिकारी नंद कुमार साहू पर जिम्मेदारी का गलत तरीके से निर्वहन करने का आरोप है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने किसानों से अपने हक और अधिकार के लिए जागरूक रहने की अपील भी की।
प्राधिकृत अधिकारी ने स्वीकार की गलती
प्राधिकृत अधिकारी नंद कुमार साहू ने जांच अधिकारियों के समक्ष स्वीकार किया कि ग्राम पलारी के मानस मंच के पास किसानों का धान रखा हुआ था, जहां 20 दिसंबर को विश्व हिंदू जागरण मंच का कार्यक्रम प्रस्तावित था। मंच के आसपास खुले में रखे धान को हटाने के लिए आनन-फानन में रास्ता निकालते हुए उन्होंने स्वयं किसान को बिना टोकन और गेटपास धान अंदर लाने की अनुमति दी।
सहायक प्रबंधक और किसान का पक्ष
सहायक प्रबंधक चंद्रहास साहू ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि धान किस समय और किसके कहने पर लाया गया, क्योंकि धान का ग्रेडिंग नहीं हुआ था।
वहीं, किसान के प्रतिनिधि फगवा राम ने बताया कि दो दिन पहले प्राधिकृत अधिकारी से बातचीत के बाद ही धान खरीदी केंद्र लाया गया था और बताया गया था कि तौल अभी हो जाएगी, जबकि खाते में एंट्री 1 जनवरी 2026 (टोकन तिथि) को की जाएगी।
किसानों का आक्रोश क्यों?
क्षेत्र के किसानों में नाराजगी का मुख्य कारण यह है कि सरकार द्वारा 30% ऑफलाइन टोकन की व्यवस्था के बावजूद गरीब किसान आज भी धान बेचने के लिए भटक रहे हैं। ऐसे में नियमों को तोड़कर किसी खास किसान का धान पहले खपाने की कोशिश किसानों के साथ भेदभाव और अन्याय को दर्शाती है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
किसानों का कहना है कि यदि सरकारी सिस्टम को तोड़-मरोड़ कर मनमानी की गई, तो किसान-हितैषी नीतियों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की लापरवाही से किसानों का भरोसा टूट रहा है।
फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि इस मामले में दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल हो पाती है या नहीं।



