नगर में बिखरती भाजपा? नगर परिषद अध्यक्ष के तानाशाही रवैये से बढ़ी अंदरूनी कलह

अनूपपुर/जैतहरी। मदन मोहन मिश्रा
जैतहरी नगर परिषद में सब कुछ ठीक-ठाक होने के दावों के बीच सियासी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नगर परिषद अध्यक्ष उमंग गुप्ता जहां सार्वजनिक मंचों से पूरे नगर को “एक माला में पिरोने” और समान विकास का दावा करते हैं, वहीं उनकी कार्यशैली और व्यवहार को लेकर सवाल नगर की गलियों से लेकर परिषद के भीतर तक गूंजने लगे हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब अध्यक्ष अपने ही पार्षदों को साथ नहीं रख पा रहे, तो पूरे नगर को एकजुट करने का दावा कितना सच्चा है? अनुभवहीनता, आक्रोश और अहंकार—तीनों का घातक मिश्रण नगर की राजनीति को अस्थिर करता दिख रहा है।
जनता से विकास के नाम पर वादे, व्यवहार में अपमान
कहते हैं राजनीति शतरंज का खेल है, लेकिन जैतहरी में यह खेल ऐसा प्रतीत हो रहा है जहां केवल “राजा” और उसके चहेते ही मायने रखते हैं। आरोप है कि नगर परिषद अध्यक्ष कुछ गिने-चुने कार्यों को दिखाकर विकास का श्रेय लेना चाहते हैं, जबकि आम नागरिकों से उनका व्यवहार लगातार कठोर और अपमानजनक रहा है।
इसी क्रम में 31 दिसंबर 2025 की एक घटना ने पूरे नगर को झकझोर दिया। आरोप है कि श्री रतन टाटा व्यापारिक परिसर से जुड़ी एक मामूली घटना को लेकर अध्यक्ष उमंग गुप्ता ने एक चार वर्षीय मासूम आयांश राठौर के पिता देव साय राठौर के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। बताया जाता है कि बच्चे से हुई बचकानी गलती को लेकर यह विवाद इतना बढ़ गया कि मामला सार्वजनिक आक्रोश का कारण बन गया।
नगर में सवाल उठ रहे हैं—क्या प्रशासनिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी असंवेदनशीलता की अपेक्षा की जा सकती है? क्या बच्चे की गलती का हिसाब उसके पिता से हिंसा के जरिए लिया जाना न्यायसंगत है?
उद्घाटन समारोह में ही दिखा भाजपा का अंतर्विरोध
18 जनवरी 2026 को प्रस्तावित भव्य उद्घाटन समारोह को लेकर भी भाजपा की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के कई पार्षदों—पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों सहित—ने कार्यक्रम से दूरी बना ली। इससे यह संदेश गया कि नगर परिषद अध्यक्ष की कार्यशैली से न केवल विपक्ष, बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर भी असंतोष गहराता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो जैतहरी में भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पिता-पुत्र और विवादों की विरासत
यह पहला मौका नहीं है जब गुप्ता परिवार का नाम विवादों से जुड़ा हो। अध्यक्ष के पिता अनिल गुप्ता पर भी कुछ माह पूर्व नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष एवं सम्मानित ब्राह्मण महिला के साथ अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप लगा था। उस घटना ने भी नगर में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की थी।
अब वही रवैया पुत्र उमंग गुप्ता में दोहराया जाता दिख रहा है। हालिया घटनाओं के बाद थाना जैतहरी में मामला दर्ज होना इस बात का संकेत है कि जनता अब चुप रहने के मूड में नहीं है।
विकास पहले भी हुआ, दिखावा नया है
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जैतहरी नगर परिषद में विकास कार्य कोई नई बात नहीं है। पूर्व अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल और श्रीमती नवरत्नी विजय शुक्ला के कार्यकाल में भी नगर में कई ठोस और स्थायी विकास कार्य हुए, जिनका लाभ आज भी नगरवासी उठा रहे हैं।
आरोप यह भी है कि वर्तमान परिषद द्वारा अधिकतर कार्य केवल रंग-रोगन और उद्घाटन तक सीमित हैं। वार्ड क्रमांक 11 सहित कई वार्ड आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
भाजपा के लिए चेतावनी की घंटी
जैतहरी की वर्तमान स्थिति भाजपा के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि नेतृत्व ने समय रहते अध्यक्ष की कार्यशैली और व्यवहार पर लगाम नहीं लगाई, तो नगर में पार्टी की साख को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।
अब सवाल सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, लोकतांत्रिक व्यवहार और जनता के सम्मान का है—और यही सवाल जैतहरी की राजनीति का भविष्य तय करेंगे।



