वृद्ध के साथ 35 लाख की ठगी: जमीन सौदे में धोखा,जान से मारने की धमकी,एफआईआर की मांग तेज

तहसीलदार पर भी भ्रष्टाचार के आरोप,फर्जी आधार और नामांतरण का खुलासा।
भारत सम्मान/सूरजपुर/ फिरोज खान:- जिले के एक 60 वर्षीय बुजुर्ग के साथ 35 लाख रुपये की जमीन सौदे में धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम रैसरा, तहसील ओडगी निवासी पीड़ित देवीदयाल बरगाह ने पुलिस अधीक्षक सूरजपुर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि कुछ शातिर लोगों ने सुनियोजित साजिश के तहत न केवल उनकी पुश्तैनी जमीन हड़प ली, बल्कि 30 लाख रुपये की रकम भी दबा ली है। यही नहीं, अब उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है और एक महिला के माध्यम से झूठे केस में फंसाने की कोशिश भी की जा रही है।
जमीन का सौदा,पर धोखा और धमकी।
शिकायती पत्र के मुताबिक, देवीदयाल बरगाह ने अपनी पुश्तैनी भूमि (खसरा नंबर 1546/2 व 1572/2, रकबा क्रमश: 1.14 हेक्टेयर और 0.29 हेक्टेयर) का सौदा 35 लाख रुपये में किया था। सौदा करने वालों में आरोपी देवीदयाल पिता सिलोचन (निवासी रैसरा, थाना सूरजपुर), कैलाश लोहार (चौकी चेद्रा, थाना झिलमिली), सम्मेजान (दुरती, थाना भटगांव) और दशरथ राजवाड़े (थाना प्रतापपुर चेद्रा) शामिल हैं। पीड़ित का आरोप है कि इन लोगों ने केवल ₹5 लाख नकद, ₹4 लाख चेक और ₹1 लाख नकद अलग से दिए-इस प्रकार कुल 10 लाख दिए और बाकी ₹25 लाख की रकम हड़प ली गई। न केवल पैसे नहीं लौटाए गए, बल्कि जमीन भी फर्जी दस्तावेजों से अपने नाम कर ली गई है।

पहचान पत्र में हेराफेरी,तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके बच्चे के आधार कार्ड में पिता के नाम में हेराफेरी कर फर्जी पहचान पत्र तैयार किया गया और उसी के आधार पर तहसील ओडगी में नामांतरण प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। पीड़ित ने तहसीलदार पर भी आरोप लगाया है कि उन्होंने रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण स्वीकृत किया।
अब जान से मारने की धमकी,आरोपी फरार।
देवीदयाल बरगाह ने बताया कि जब उन्होंने बाकी रकम की मांग की, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और अब मोबाइल बंद कर फरार हो गए हैं। बुजुर्ग का कहना है कि यह उनकी पूरी जिंदगी की कमाई थी, जिसे एक संगठित गिरोह ने धोखे से लूट लिया।

एसपी से न्याय की गुहार,FIR की मांग।
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, आरोपियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए और उनकी 30 लाख की शेष राशि वापस दिलाई जाए। साथ ही उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
सवालों के घेरे में सिस्टम।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी का है, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली की सुस्ती और भ्रष्टाचार पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। तहसील स्तर पर रिश्वतखोरी, पहचान पत्रों में हेराफेरी और पुलिस की निष्क्रियता ने एक वृद्ध को न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है। अब देखना यह है कि सूरजपुर पुलिस प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दब कर रह जाएगा।



