युवाओं ने खाई में गिरी बुजुर्ग महिला को बचाया, लकड़ी-साड़ी से बनाई स्ट्रेचर, चार किमी पैदल चलकर पहुंचाया अस्पताल

चिरमिरी | 11 जुलाई 2025 । शब्बीर मोमिन
चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में मानवता और साहस का ऐसा उदाहरण सामने आया है, जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा। वार्ड क्रमांक 34 के पार्षद राहुल भाई पटेल और उनके साथियों ने मिलकर गहरी खाई में दो दिन से घायल अवस्था में पड़ी एक बुजुर्ग महिला को न केवल खोजा, बल्कि असाधारण साहस का परिचय देते हुए पैदल चार किलोमीटर तक कंधों पर ढोकर अस्पताल पहुंचाया। उनकी इस मानवीय पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
कैसे मिला बुजुर्ग महिला का सुराग
पार्षद राहुल भाई पटेल ने बताया कि शुक्रवार सुबह वे नगर निगम कार्यालय जा रहे थे, तभी भूकभुकी नाला के पास सन्नी, निशांत और मोंटी नामक तीन युवकों ने उन्हें रोककर बताया कि उन्होंने खाई में एक महिला को गिरे हुए देखा है। राहुल पटेल तत्काल युवकों के साथ खाई की ओर बढ़े, लेकिन गहराई देखकर शुरुआती प्रयास में वे नीचे नहीं उतर सके।

संगठित प्रयास से रची गई राहत की कहानी
बाद में कुछ अन्य युवाओं — सुभाष महतो, आर्केश, धीरज देवांगन और अंशु राजवाड़े — को साथ लेकर ये सभी खाने-पीने का सामान और पानी लेकर पुनः खाई में उतरे। लगभग 400 से 500 फीट गहराई में उन्हें एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। महिला ने बताया कि वह दो दिन पहले खाई में गिर गई थी और पानी पीकर किसी तरह जीवित रही।
लकड़ी-साड़ी से बना स्ट्रेचर, फिर पैदल संघर्ष
महिला को ऊपर लाना आसान नहीं था। टीम ने तत्काल लकड़ियों, साड़ियों और रस्सियों की मदद से एक अस्थायी स्ट्रेचर तैयार किया और बारी-बारी से कंधों पर उठाकर उन्हें लगभग चार किलोमीटर दूर दुबछोला तक पैदल पहुंचाया। वहां से वाहन मंगाकर महिला को खड़गवां अस्पताल भेजा गया, जहां उनका प्रारंभिक उपचार चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार महिला अब खतरे से बाहर है।

परिवार की तलाश जारी
महिला ने अपना नाम मुन्नी, बेटी का नाम लक्ष्मनिया और बेटे का नाम दुर्गेश बताया है, लेकिन वह अपने घर का सही पता नहीं बता पा रही है। पार्षद राहुल भाई पटेल ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई इस महिला या उसके परिवार को पहचानता हो, तो तत्काल जानकारी दें, ताकि परिवार तक सूचना पहुंचाई जा सके।
समाज को प्रेरणा देने वाला कार्य
बुजुर्ग महिला को बचाने के इस असाधारण प्रयास की नगरवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने खुले दिल से प्रशंसा की है। विपरीत परिस्थितियों में भी जिस समर्पण और साहस का परिचय इन युवाओं ने दिया, वह आज के समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है।
यह घटना न सिर्फ इंसानियत को जीवंत करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदना हो, तो कोई भी जीवन बचाया जा सकता है।



