फुटबॉल फाइनल की आड़ में ‘फूहड़ता महोत्सव’ सरकारी पद, सार्वजनिक मंच और संस्कृति तीनों की खुलेआम बेइज्जती

स्कूल मैदान में अश्लील नृत्य, मंच पर नोट उड़ाता दिखा रोजगार सहायक
कोरिया | सोनहत | सब्बीर मोमिन
छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर अश्लीलता का जो सिलसिला सूरजपुर के कुमेली से शुरू हुआ था, वह अब कोरिया जिले के सोनहत तक पहुँच चुका है। ग्राम पंचायत पोड़ी में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मैच खेल भावना के बजाय फूहड़ता, अश्लीलता और सरकारी मर्यादाओं की धज्जियाँ उड़ाने के लिए याद किया जाएगा।
फुटबॉल फाइनल और ‘फूहड़ता’ का आगाज़
शुक्रवार रात ग्राम पंचायत पोड़ी के स्कूल मैदान परिसर में फुटबॉल टूर्नामेंट के समापन समारोह के नाम पर जो दृश्य सामने आया, वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने के लिए काफी है। फिल्मी गानों पर डांसरों द्वारा खुलेआम अश्लील नृत्य कराया गया। मंच और मैदान, दोनों जगह मर्यादा और नियमों को ताक पर रख दिया गया।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि यह सब स्कूल परिसर में हो रहा था—जहाँ पढ़ाई, संस्कार और अनुशासन की बात होती है।
रोजगार सहायक बना फूहड़ता का पोस्टर बॉय
इस पूरे आयोजन का सबसे विवादित चेहरा बना ग्राम पंचायत पोड़ी का रोजगार सहायक जिंदरसाय सोनवानी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी—
मंच पर डांसरों के साथ नाच रहा है!
खुलेआम नोटों की बारिश कर रहा है!
और सरकारी सेवा की गरिमा को पैरों तले रौंद रहा है!
जिस हाथ में मनरेगा और पंचायत विकास के हिसाब-किताब होने चाहिए, उसी हाथ से नोटों की गड्डियाँ फूहड़ता पर उड़ाई जा रही थीं। नोट ऐसे उछाले जा रहे थे मानो रोजगार सहायक को पैसों की कोई कमी ही न हो।
‘करोड़पति रोजगार सहायक’ की चर्चा गांव-गांव
ग्रामवासियों का कहना है कि पोड़ी पंचायत का यह रोजगार सहायक पहले से ही “करोड़पति” के नाम से चर्चित है।
ग्रामीणों के आरोप हैं—
न महिलाओं के सम्मान की चिंता!
न बच्चों की मौजूदगी की परवाह!
न ही सार्वजनिक मंच की मर्यादा का कोई ख्याल!
जिस स्कूल मैदान में यह आयोजन हो रहा था, वहाँ आसपास के गांवों से महिलाएं और बच्चे कार्यक्रम देखने आए थे। लेकिन मंच पर बढ़ती फूहड़ता देखकर कई महिलाएं कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर लौट गईं। इसके बावजूद पूरी रात “सजी-धजी महिलाओं के नाच” का सिलसिला चलता रहा।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
अनुमति किसने दी?
स्कूल परिसर में अश्लील कार्यक्रम कैसे हुआ?
जिम्मेदार कर्मचारी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
यह घटना साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और संरक्षण की ओर इशारा करती है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने जताई कड़ी आपत्ति
भरतपुर–सोनहत विधानसभा के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए कहा—
“छत्तीसगढ़ की संस्कृति नाचा और गम्मत की है, अश्लीलता की नहीं। गरियाबंद और सूरजपुर की घटनाओं के बाद भी अगर प्रशासन नहीं जागा, तो सोनहत के पोड़ी में जो हुआ, वह उसी का नतीजा है। स्कूल परिसर में इस तरह का नंगा नाच और एक जिम्मेदार रोजगार सहायक द्वारा नोट उड़ाना प्रशासनिक शिथिलता का जीता-जागता प्रमाण है। मैं कलेक्टर से मांग करता हूं कि ऐसे कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए जो सार्वजनिक रूप से पद की गरिमा गिरा रहे हैं।”
अब सवाल यह नहीं कि क्या हुआ, सवाल यह है—कब कार्रवाई होगी?
यह मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं, यह सरकारी पद के दुरुपयोग, स्कूल परिसर की पवित्रता भंग होने, और ग्रामीण समाज पर गलत प्रभाव डालने का है। अगर इस घटना पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ हो जाएगा कि छत्तीसगढ़ में फूहड़ता को मौन सहमति मिल चुकी है।



