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हाथियों और तेंदुए के खौफ के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण, प्रशासनिक उदासीनता से हालात बदतर

अनूपपुर | जैतहरी | स्पेशल स्टोरी

संभागीय ब्यूरो चीफ: राजेश कुमार चौधरी

अनूपपुर जिले के जैतहरी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्रामीण इलाकों में हाथियों का आतंक अब मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। बीते तीन वर्षों से छत्तीसगढ़ सीमा से लगे जंगलों के रास्ते अनूपपुर जिले में हाथियों का निरंतर मूवमेंट बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बीते 31 दिनों से तीन हाथियों का एक समूह क्षेत्र में डेरा जमाए हुए है, जो रात होते ही जंगल से सटे गांवों में प्रवेश कर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।

सबसे चिंताजनक स्थिति ग्राम पंचायत कुकुरगोड़ा, क्योंटार और पड़रिया क्षेत्र की है। कुकुरगोड़ा पंचायत के जंगल से सटे बेल्हाटोला निवासी झुमुकलाल कोल और बल्कू कोल का कच्चा मकान हाथियों द्वारा बीते तीन वर्षों में कई बार तोड़ा जा चुका है। 27 दिसंबर को एक बार फिर हाथियों ने उनका घर ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद दोनों परिवार घर के पास बनी पुलिया के नीचे रहने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा।

इसी तरह ग्राम पंचायत क्योंटार में एक बैगा परिवार बीते तीन वर्षों से हाथियों के भय के कारण बरगद के पेड़ पर रहने को विवश है। परिवार ने पेड़ के ऊपर खाट डालकर अस्थायी आश्रय बनाया है, जहां तीन से चार सदस्य खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं। वहीं पड़रिया पंचायत अंतर्गत ग्राम चोई में जंगल के समीप रहने वाले विरन नापित हाथियों के डर से अपने घर की छत पर रहने को मजबूर हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट में यह स्पष्ट सामने आया कि प्रशासनिक लापरवाही और वन्यजीवों के लगातार विचरण के कारण ग्रामीणों को रात के समय कभी पेड़ों पर, कभी पुल के नीचे और कभी छतों पर शरण लेनी पड़ रही है। ठंड के इस मौसम में 6 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच बच्चों सहित पूरे परिवार का खुले में रात बिताना बेहद अमानवीय स्थिति को दर्शाता है। कई परिवारों के बच्चे स्कूल जाना छोड़ चुके हैं, क्योंकि रात भर जागने और डर के माहौल में पढ़ाई संभव नहीं रह गई है।

वन विभाग के अनुसार 23 दिसंबर को तीन हाथियों का यह समूह छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र से अनूपपुर जिले में प्रवेश कर चोलना और धनगंवा वन बीट के जंगलों में दिन में विश्राम करता है और शाम ढलते ही ग्राम पंचायत क्योंटार के कुसुमहाई, पांड़ाडोल, झंडीटोला, पड़रिया के चोई गांव के भलुवानटोला तथा कुकुरगोड़ा के बेल्हाटोला, कोसमटोला और सरईहा टोला में पहुंचकर अब तक 6 से अधिक कच्चे मकानों और फसलों को नुकसान पहुंचा चुका है। वन विभाग द्वारा गश्ती दल बनाकर निगरानी तो की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि हाथियों द्वारा फसल क्षति पर मिलने वाला मुआवजा भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। चोई गांव के निवासियों ने पड़रिया हल्का के पटवारी पर जांच के लिए न आने, मनमानी करने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

स्थिति को और भयावह बनाते हुए क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी भी सामने आई है। हाल ही में ग्राम पंचायत क्योंटार अंतर्गत ग्राम रोहिलाकछार में तेंदुए ने एक गाय पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। वहीं पड़रिया पंचायत के चोई गांव के वार्ड नंबर 12 के आसपास भी तेंदुए के देखे जाने की सूचना है। हाथियों और तेंदुए के बीच फंसे ग्रामीणों की हालत सचमुच “आगे कुआं, पीछे खाई” जैसी हो गई है।

अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और वन विभाग कब तक हालात बिगड़ने का इंतजार करेगा। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर तत्काल राहत शिविर उपलब्ध कराए जाएं, स्थायी समाधान के लिए हाथियों के मूवमेंट को नियंत्रित किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा व पुनर्वास दिया जाए। अन्यथा यह दहशत किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है।

Bharat Samman

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