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फर्जी भूमि बिक्री और आत्महत्या का मामला: तहसीलदार निलंबित, मग्गू सेठ पर कार्रवाई में देरी से सर्व आदिवासी समाज नाराज

बलरामपुर, छत्तीसगढ़, 06 मई 2025

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में फर्जी भूमि बिक्री और एक पहाड़ी कोरवा व्यक्ति की आत्महत्या का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। ग्राम भेस्की में पहाड़ी कोरवा समुदाय की जमीन की फर्जी बिक्री के मामले में तत्कालीन तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन बलरामपुर में विनोद अग्रवाल उर्फ मग्गू सेठ और उनके साथियों पर कार्रवाई में देरी से सर्व आदिवासी समाज और पीड़ित परिवार में गुस्सा बढ़ता जा रहा है, जल्द बड़े आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है।

बलरामपुर जिले में फर्जी बिक्री और आत्महत्या का मामला…

अम्बिकापुर जनसंपर्क कार्यालय की 05 मई 2025 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बलरामपुर जिले के विकासखंड राजपुर के ग्राम भेस्की में पहाड़ी कोरवा समुदाय के व्यक्ति जुबारो की जमीन को फर्जी तरीके से बेचा गया। जांच में पाया गया कि तत्कालीन तहसीलदार एवं प्रभारी उप पंजीयक राजपुर, यशवंत कुमार ने सह-खातेदार की भूमि होने के बावजूद और निर्धारित आदेशों का उल्लंघन करते हुए बिक्रयनामा पंजीकृत करवाया। कलेक्टर के आदेश के अनुसार, पहाड़ी कोरवा, पण्डो, मझवार और मांझी जनजातियों की भूमि की खरीद-बिक्री बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नहीं की जा सकती।

इस धोखाधड़ी को संगठित अपराध मानते हुए, सरगुजा संभागायुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने यशवंत कुमार को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनका मुख्यालय अब कलेक्टर कार्यालय सूरजपुर निर्धारित किया गया है, और निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

इसके साथ ही, ग्राम भेस्की के एक अन्य पहाड़ी कोरवा व्यक्ति बहिरा ने मग्गू सेठ और उनके साथियों की प्रताड़ना के कारण आत्महत्या कर ली। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बहिरा पर अपनी जमीन को फर्जी तरीके से हड़पने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसके चलते उसने यह कठोर कदम उठाया। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य को आत्महत्या के लिए उकसाता या मजबूर करता है, तो उसे आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) का दोषी माना जा सकता है। हालांकि, मग्गू सेठ पर धारा 108 के तहत कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे सर्व आदिवासी समाज में भारी नाराजगी है।

सर्व आदिवासी समाज की शिकायत और मांग…

दिनांक 05 मई 2025 को, पीड़ित परिवार और सर्व आदिवासी समाज ने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा को लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें मग्गू सेठ और उनके साथियों पर (BNS) की धारा 108 के तहत कार्रवाई और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई। समाज का कहना है कि प्रशासन की सुस्ती के कारण दोषी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे आदिवासी समुदाय में भय और आक्रोश बढ़ रहा है।

रायगढ़ में मग्गू सेठ और उनके साथी फरार…

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में मग्गू सेठ के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों और अवैध संपत्ति अर्जन के आरोपों ने जोर पकड़ा है। 22 अप्रैल 2025 को स्थानीय सूत्रों ने बताया कि मग्गू सेठ पर 2009 से 2024 तक हत्या, जबरन वसूली, और जमीन हड़पने जैसे गंभीर अपराधों के आरोप हैं। उनकी संपत्तियों को Proceeds of Crime मानते हुए, Enforcement Directorate (ED) और पुलिस से जांच की मांग की जा रही है।

मग्गू सेठ और उनके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत कार्रवाई शुरू हो चुकी है। लेकिन धारा 108 के तहत कार्रवाई न होने से स्थानीय समुदाय नाराज है। मग्गू सेठ और उनके साथी अभी भी फरार हैं, और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयासरत है।

कानूनी प्रावधान और संभावित कार्रवाई…

Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत, अपराध से अर्जित संपत्ति को Proceeds of Crime मानकर ED जब्त कर सकती है। इसके अलावा, Benami Transactions Act के तहत भी कार्रवाई संभव है। मग्गू सेठ के खिलाफ आयकर छापेमारी, PMLA केस, और बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई की संभावना है। लेकिन मग्गू सेठ और उनके साथियों की फरारी जांच में बाधा डाल रही है।

स्थानीय प्रतिक्रिया और भविष्य…

इन दोनों मामलों ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदायों की जमीनों की सुरक्षा और उनके मानसिक उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बलरामपुर में तहसीलदार के निलंबन को सही दिशा में कदम माना जा रहा है, लेकिन बहिरा की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार लोगों पर धारा 108 के तहत कार्रवाई न होने से सर्व आदिवासी समाज और पीड़ित परिवार में गुस्सा है। यदि जांच तेज होती है और मग्गू सेठ को गिरफ्तार कर उचित धाराओं के तहत सजा दी जाती है, तो यह छत्तीसगढ़ में आपराधिक गतिविधियों और अवैध संपत्ति अर्जन के खिलाफ बड़ा कदम साबित हो सकता है।

Bharat Samman

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