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थाना प्रभारी पर लगा वसूली का आरोप, अनुमति के बावजूद ट्रैक्टर जब्त करने का मामला गरमाया

वाड्रफनगर/बसंतपुर, रामहरि गुप्ता ।

बलरामपुर जिले के अंतर्गत वाड्रफनगर विकासखंड के बसंतपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य के लिए बालू-रेता ढुलाई को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बसंतपुर निवासी एक ट्रैक्टर मालिक ने थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वैध अनुमति होने के बावजूद उसके ट्रैक्टर को जब्त कर चालान कर दिया गया। इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया है और लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

मिली जानकारी के अनुसार इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण कार्य चल रहा है। इन आवासों के निर्माण के लिए हितग्राहियों को नदी से बालू-रेता लाने की आवश्यकता होती है। इसके लिए आवास हितग्राही ग्राम पंचायत में आवेदन देते हैं, जिसमें ट्रैक्टर मालिक का नाम भी दर्ज किया जाता है। पंचायत द्वारा आवेदन को जनपद पंचायत भेजा जाता है और जनपद से अनुमति मिलने के बाद संबंधित ट्रैक्टर मालिक आवास निर्माण के लिए बालू-रेता ढुलाई करता है।

इसी प्रक्रिया के तहत बसंतपुर निवासी कैलाश यादव, पिता स्वर्गीय जीतन यादव, ने भी 4 मार्च 2026 को अपने ट्रैक्टर से प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही के लिए बालू-रेता ढुलाई शुरू की थी। बताया जाता है कि उनके पास जनपद पंचायत से प्राप्त अनुमति आदेश भी मौजूद था।

कैलाश यादव का आरोप है कि जब वह ट्रैक्टर से बालू-रेता लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में एक व्यक्ति ने गाड़ी रोककर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद बसंतपुर पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर को रोक लिया। कैलाश यादव के अनुसार उन्होंने पुलिस को बालू-रेता ढुलाई से संबंधित अनुमति आदेश भी दिखाया, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने ट्रैक्टर को जबरन बसंतपुर थाने ले जाकर खड़ा कर दिया।

कैलाश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि थाना प्रभारी से जुड़े एक कथित दलाल द्वारा उनसे 10 हजार रुपये की मांग की गई। उनका कहना है कि उनसे कहा गया कि यदि रकम दे दी जाए तो मामला खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि कैलाश यादव ने पैसे देने से इनकार कर दिया और कहा कि उनके पास ढुलाई की वैध अनुमति है, इसलिए वह किसी भी प्रकार की रकम नहीं देंगे।

आरोप है कि पैसे देने से इनकार करने के कुछ दिनों बाद पुलिस द्वारा उनके ट्रैक्टर का चालान कर दिया गया। इस कार्रवाई से कैलाश यादव खुद को परेशान और पीड़ित बता रहे हैं। उनका कहना है कि वैध अनुमति के बावजूद कार्रवाई करना अनुचित है और इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है।

इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई ट्रैक्टर बिना अनुमति के भी बालू-रेता ढुलाई करते नजर आते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं होती। वहीं अनुमति के साथ काम कर रहे लोगों पर कार्रवाई होने से लोगों में असंतोष देखा जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं तो प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उनका मानना है कि जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई नियमों के तहत हुई या फिर किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।

इधर पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बालू-रेता के अवैध परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है और नियमों के अनुसार ही कदम उठाए जाते हैं।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच कर क्या निष्कर्ष निकाला जाता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।

Bharat Samman

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