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सवा करोड़ सिंधी शंकराचार्यों के संपर्क में आकर शास्त्रसम्मत जीवन की मिसाल कायम करें : साईं जलकुमार मसन्द

लखनऊ में सिंधी समाज को गीतापाठ एवं लोकसेवा केंद्र स्थापित करने का आह्वान

रायपुर / लखनऊ। सुष्मिता मिश्रा

मसन्द सेवाश्रम रायपुर के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द ने सिंधी समाज से वैदिक परंपराओं के अनुरूप जीवन जीने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत के सवा करोड़ सिंधी यदि सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के धर्मगुरु शंकराचार्यों के संपर्क में रहकर शास्त्रसम्मत जीवन अपनाएं, तो वे पूरे समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकते हैं।

वे लखनऊ स्थित सिंधी समाज के विख्यात धाम सखी बाबा आसूदाराम आश्रम में आयोजित एक उद्बोधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम उस समय आयोजित हुआ जब साईं जलकुमार मसन्द, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज के साथ वाराणसी से लखनऊ तक चली चार दिवसीय गौ माता प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध प्रचार यात्रा पूर्ण कर 11 व 12 मार्च को दो दिन के प्रवास पर आश्रम में ठहरे थे।

वैदिक जीवन पद्धति ही मानव कल्याण का मार्ग

अपने उद्बोधन में साईं मसन्द ने कहा कि शंकराचार्य हिंदू समाज के सर्वोच्च धर्मगुरु हैं, जो सनातन वैदिक परंपराओं के अनुसार जीवन जीने की राह दिखाते हैं। वैदिक ज्ञान मानव जीवन को सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण बनाने का मार्ग प्रदान करता है। इसमें जल, थल और आकाश से जुड़े जीवन के हर पक्ष के लिए दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यवहारिक समाधान मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पुरानी सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़े सिंधी समाज की जीवन शैली सदैव वैदिक मूल्यों के अनुरूप रही है। इसलिए आज आवश्यकता है कि सिंधी समाज पुनः अपने मूल संस्कारों और वैदिक परंपराओं की ओर लौटे।

हर मोहल्ले में बने गीतापाठ एवं लोकसेवा केंद्र

साईं मसन्द ने देश भर की सिंधी पंचायतों और समाजसेवी संस्थाओं से अपील की कि हर मोहल्ले में गीतापाठ एवं लोकसेवा केंद्र स्थापित किए जाएं। इन केंद्रों में प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ और लोकहित के कार्य किए जाएं।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में निष्काम भाव से कर्म करने की शिक्षा दी गई है। वर्तमान समय में देश में बढ़ते स्वार्थ और नैतिक गिरावट के माहौल को समाप्त करने के लिए गीता के संदेश को समाज में व्यापक रूप से फैलाना आवश्यक है।

लोकसेवा से मिलेगा योजनाओं का लाभ

साईं मसन्द ने कहा कि इन लोकसेवा केंद्रों के माध्यम से केंद्र, राज्य और स्थानीय शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने का अभियान भी चलाया जा सकता है। इससे समाज के जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और सरकारी कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी कम करने में सहायता मिलेगी।

लखनऊ में केंद्र स्थापित करने की जिम्मेदारी

इस अवसर पर सिंधी साहित्य अकादमी लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष मुखी नानकचंद लखमाणी ने लखनऊ में सिंधी समाज की ओर से गीतापाठ एवं लोकसेवा केंद्र स्थापित करने की जिम्मेदारी लेने की घोषणा की।

कार्यक्रम में आश्रम के वर्तमान पीठाधीश साईं हरीशलाल, आश्रम के सचिव किशनलाल, वरिष्ठ सेवादार भाई दर्शनलाल, मुखी सुदामचंद चांदवाणी, सुरेशलाल वलेचा सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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