पैसों के विवाद ने दोस्ती को बनाया दुश्मनी, युवक पर जानलेवा हमला — हालत नाजुक

दिल्ली । क्राईम रिपोर्ट
दिल्ली के यमुना विहार से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पैसों के लेनदेन का विवाद इतना बढ़ गया कि दोस्ती खूनी दुश्मनी में बदल गई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के दौर में पैसा रिश्तों से बड़ा हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वैभव नामक युवक का अपने दोस्त मुकुल जैन के साथ पैसों का लेनदेन था। वैभव को अपनी रकम वापस लेनी थी, लेकिन मुकुल लगातार टालमटोल कर रहा था। इसी बीच मुकुल जैन ने विश्वास का फायदा उठाते हुए वैभव को अपने साथ कालाढूंगी (उत्तराखंड) चलने के लिए राजी कर लिया।
बताया जा रहा है कि वहां पहुंचने के बाद रात के समय पैसों को लेकर दोनों के बीच फिर से विवाद शुरू हुआ, जो जल्द ही हिंसक झगड़े में बदल गया।
बेरहमी से किया हमला
आरोप है कि मुकुल जैन ने अपने साथियों हजारी लाल और राहुल गौतम के साथ मिलकर वैभव पर जानलेवा हमला कर दिया। तीनों ने मिलकर वैभव को बुरी तरह पीटा, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई। हमला इतना क्रूर था कि वैभव अधमरी हालत में वहीं छोड़ दिया गया और आरोपी मौके से फरार हो गए।
अगली सुबह हुआ खुलासा
घटना का खुलासा अगले दिन 9 अप्रैल 2026 की सुबह हुआ, जब वैभव के ड्राइवर को इसकी जानकारी मिली। वह तुरंत वैभव को दिल्ली लेकर आया। घर पहुंचने पर पत्नी सृष्टि ठाकुर ने उसकी हालत देखी और बिना देर किए उसे सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया।
डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए उसे ICU में रखा और बाद में वेंटिलेटर पर शिफ्ट करना पड़ा। फिलहाल वैभव जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
पुलिस कार्रवाई और सवाल
इस मामले में पुलिस ने कालाढूंगी थाने में मुकुल जैन, हजारी लाल और राहुल गौतम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी हजारी लाल को गिरफ्तार कर लिया गया है मुख्य आरोपी मुकुल जैन और राहुल गौतम अब भी फरार है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन घटना के करीब 25 दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
परिवार की न्याय की मांग
पीड़ित की पत्नी सृष्टि ठाकुर ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं वैभव के मामा डॉ. त्रिलोक चंद (पूर्व एसएसबी डीआईजी) ने भी सख्त कार्रवाई की अपील की है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई जरूरी है ताकि कानून का भय बना रहे।
बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप का आईना भी है—जहां पैसों का विवाद इंसान को हैवान बना देता है।
क्या पुलिस जल्द आरोपियों को पकड़ पाएगी?
क्या वैभव को समय पर न्याय मिलेगा?
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर बनी हुई है।



