SECL की बस पुलिया से गिरी, ड्राइवर की मौत – 13 कर्मचारी घायल, परिजनों में रोष

इस बार सिर्फ रिपोर्ट नहीं, इंसाफ भी चाहिए…
सूरजपुर, 23 जून 2025 | विशेष संवाददाता
भटगांव के कोयलांचल क्षेत्र में शनिवार रात एक बड़ा हादसा हुआ जब एसईसीएल कर्मचारियों से भरी बस सुखाड़ पुलिया से अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी। दुर्घटना में बस चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 13 कर्मचारी घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों को अंबिकापुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसे की वजह – पुलिया की बदहाल हालत, जिम्मेदार कौन?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिया में गड्ढे की वजह से बस असंतुलित हो गई और चालक नियंत्रण खो बैठा। पुलिया की स्थिति पहले से ही खराब थी और इस जगह पर तीन साल पहले भी एक बड़ा हादसा हो चुका है, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस मरम्मत नहीं करवाई गई।

एसईसीएल और पीडब्ल्यूडी पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का कहना है कि एसईसीएल ने सड़क मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी को करोड़ों रुपये दिए थे, लेकिन घटिया निर्माण और मेंटेनेंस की अनदेखी के चलते यह हादसा हुआ। ठेकेदारों को बिना गुणवत्ता देखे काम दिया गया और परिणामस्वरूप सड़क और पुलिया दोनों खतरे में हैं।
कलेक्टर-SP ने किया मुआयना, पर जनता पूछ रही – क्या बदलेगा कुछ?
कलेक्टर सूरजपुर व पुलिस अधीक्षक ने अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति जानी और डॉक्टरों को हरसंभव बेहतर इलाज के निर्देश दिए। घटनास्थल का भी निरीक्षण किया गया। हालांकि, लोगों का कहना है कि हर हादसे के बाद ऐसा ही दिखावा होता है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता।

परिजनों और नागरिकों में ग़ुस्सा – बताया सिस्टम की हत्या
मृतक चालक के परिजन और अन्य घायल कर्मचारियों के घरों में मातम पसरा है। लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही को “हादसा नहीं, सिस्टम द्वारा की गई हत्या” बताया। उन्होंने कहा कि यदि समय पर पुलिया की मरम्मत होती, तो यह जान न जाती।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज – FIR की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए एसईसीएल और पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा गया कि केवल मुआवज़े और आश्वासन से बात नहीं बनेगी, बल्कि सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों।
सम्पादकीय टिप्पणी
हर बार हादसे के बाद वही जुमले – “संज्ञान लिया गया है”, “जांच की जाएगी”, “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा” – लेकिन क्या इससे जानें लौटती हैं?
अब वक्त आ गया है कि सिस्टम को केवल कागज़ी विकास से बाहर निकालकर ज़मीनी जिम्मेदारी की तरफ मोड़ा जाए। वरना हर तीसरे साल कोई पुलिया, कोई सड़क, किसी और की ज़िंदगी लील लेगी – और अफसर फिर कहेंगे, “हमने संज्ञान लिया है।”


