अध्यक्ष के गृह ग्राम में अवैध उत्खनन का आरोप, जेसीबी–ट्रैक्टर से हजारों ट्रिप मुरूम की निकासी

रिपोर्ट : सुखनंदन प्रसाद । बिल्हा, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरतोरी में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और परिवहन का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह अवैध गतिविधि जनपद पंचायत बिल्हा के अध्यक्ष रामकुमार कौशिक के संरक्षण अथवा निर्देश पर उनके गृह ग्राम में कराई जा रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते तीन सप्ताह के भीतर ग्राम बरतोरी में जेसीबी मशीन (क्रमांक CG 10 BK 4868) और 4 से 5 ट्रैक्टरों के माध्यम से 700 से 1000 ट्रिप मुरूम एवं मिट्टी का अवैध उत्खनन कर उसका परिवहन एवं विक्रय किया गया।
जेसीबी किराये पर लेने की पुष्टि, अनुमति पर संदेह
मामले की पड़ताल के दौरान जब पत्रकारों ने जेसीबी मशीन के मालिक से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि मशीन जनपद पंचायत अध्यक्ष रामकुमार कौशिक द्वारा किराये पर ली गई है। वहीं, खनन स्थल पर मौजूद एजेंट से जब अनुमति संबंधी दस्तावेजों के बारे में पूछा गया, तो उसने कहा कि
“खनन रामकुमार कौशिक द्वारा कराया जा रहा है, लेकिन परमिशन ली गई है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है।”
सूचना मिलते ही मशीनें लेकर फरार
पत्रकारों द्वारा खनन स्थल के फोटो और वीडियो साक्ष्य एकत्र कर तत्काल बिलासपुर पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, बिल्हा एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी, थाना प्रभारी अवनीश पासवान को मोबाइल फोन के माध्यम से अवगत कराया गया। सूचना मिलते ही खनन स्थल पर मौजूद लोग लोड ट्रैक्टरों को खाली कर जेसीबी और ट्रैक्टर लेकर मौके से भाग निकले।
पत्रकार को धमकीनुमा कॉल
घटना के बाद आरोप है कि जनपद पंचायत अध्यक्ष रामकुमार कौशिक ने कवरेज करने गए पत्रकार को फोन कर कहा—
“सभी काम मैं करवा रहा हूं, मेरा पंचायत है, मेरा गांव है, मेरा सरपंच है।”
जब उनसे खनिज विभाग की अनुमति के संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए फोन काट दिया।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद खनन बंद
सूचना के बाद प्रशासन और पुलिस द्वारा प्रारंभिक संज्ञान लिया गया, जिसके बाद खनन कार्य तत्काल बंद हो गया। हालांकि, अभी तक किसी प्रकार की जब्ती या एफआईआर की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
केवल बरतोरी नहीं, पूरे क्षेत्र में फैला अवैध खनन
स्थानीय ग्रामीणों और पत्रकारों का कहना है कि यह मामला केवल बरतोरी गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई गांवों में जनप्रतिनिधियों और खनन माफिया के गठजोड़ से अवैध उत्खनन लगातार जारी है।
खनन को लेकर सवाल पूछने पर अक्सर जवाब मिलता है—
“शासन–प्रशासन और सत्ता हमारे साथ है, जिसे जो करना है कर ले।”
कानूनी प्रावधान
अवैध खनन खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत दंडनीय अपराध है। धारा 21(1) के अंतर्गत अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर 2 वर्ष तक की कैद या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। धारा 23C राज्य सरकार को अवैध खनन रोकने के लिए नियम बनाने की शक्ति देती है। इसके अतिरिक्त IPC की धारा 379 (चोरी) सहित अन्य धाराओं में भी कार्रवाई संभव है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पत्रकारों और ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय विष्णु देव साय से आग्रह किया है कि वे इस प्रकरण को जनहित एवं प्रदेश हित में गंभीरता से संज्ञान में लें और न केवल बरतोरी, बल्कि पूरे प्रदेश में हो रहे अवैध उत्खनन के विरुद्ध कठोर एवं दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी करें। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच को किस स्तर तक ले जाता है और क्या जनप्रतिनिधियों पर भी कानून समान रूप से लागू हो पाता है या नहीं।



