80 फर्जी हाथी मुआवजा प्रकरण! 50–70 लाख के भुगतान पर सवाल, सहकारी बैंक में करोड़ों की FD से घिरा पसान वन परिक्षेत्र

कटघोरा/कोरबा | सुष्मिता मिश्रा
वनमंडल कटघोरा के पसान वन परिक्षेत्र में हाथी से फसल नुकसान के नाम पर बनाए गए मुआवजा प्रकरणों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि यहां करीब 80 से अधिक मुआवजा प्रकरण तैयार कर 50 से 70 लाख रुपये तक के भुगतान में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं। इस पूरे मामले में डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी की भूमिका को लेकर क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं।
80 प्रकरणों में फर्जीवाड़े की चर्चा
सूत्रों के अनुसार हाथी द्वारा फसल और संपत्ति नुकसान के नाम पर बड़ी संख्या में मुआवजा प्रकरण बनाए गए। आरोप है कि कई मामलों में स्थलीय जांच के बिना ही नुकसान दर्शाकर फाइलें तैयार कर दी गईं, जिसके आधार पर मुआवजा स्वीकृत कराया गया। यदि इन सभी प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने की आशंका जताई जा रही है।

भुगतान में 50–70 लाख तक की अनियमितता का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन प्रकरणों के माध्यम से करीब 50 से 70 लाख रुपये तक के भुगतान में अनियमितता की गई। आरोप यह भी है कि कई लाभार्थियों के नाम पर तैयार किए गए प्रकरणों में वास्तविक नुकसान का कोई ठोस प्रमाण नहीं था।
सहकारी बैंक में करोड़ों की FD की चर्चा
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई कि डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी द्वारा अपनी पत्नी और बच्चों के नाम पर सहकारी मर्यादित बैंक में करोड़ों रुपये की फिक्स डिपॉजिट (FD) और खातों में भारी रकम जमा कर रखी गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि यह जानकारी सही है तो इतनी बड़ी राशि का स्रोत क्या है।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि एक तरफ हाथी मुआवजा प्रकरणों में लाखों रुपये के फर्जीवाड़े के आरोप और दूसरी तरफ बैंक खातों में बड़ी रकम जमा होने की चर्चा पूरे मामले को बेहद संदिग्ध बना रही है। इसलिए इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं
फिलहाल इन आरोपों की किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और न ही संबंधित अधिकारी की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने आई है।
लेकिन लगातार सामने आ रही जानकारियों के बाद पसान वन परिक्षेत्र का यह मामला वन विभाग के संभावित बड़े घोटाले के रूप में चर्चा में आ गया है।
अब लोगों की नजर प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




