पटवारियों के बाद क्या राजस्व विभाग के बाबुओं की भी होगी बड़ी सर्जरी? वर्षों से जमे कर्मचारियों के तबादले की उठी मांग

बलरामपुर/कुसमी । राहुल गुप्ता
जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा हल्का पटवारियों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों के बाद अब राजस्व विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे बाबुओं (क्लर्क/कर्मचारियों) के तबादले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जिले के विभिन्न इलाकों से अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पटवारियों की तरह ही राजस्व विभाग में लंबे समय से पदस्थ बाबुओं का भी तबादला किया जाएगा या फिर यह मामला सिर्फ चर्चा तक ही सीमित रह जाएगा।
जानकारी के अनुसार जिले में कुल 11 तहसीलें हैं, जिनमें बलरामपुर, रामानुजगंज, सामरी, कुसमी, शंकरगढ़, वाड्रफनगर सहित हाल ही में घोषित चान्दो, दौरा-कोचली और रघुनाथनगर जैसी नई तहसीलें भी शामिल हैं। इन सभी तहसीलों के राजस्व कार्यालयों में कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ रहने के कारण कई कर्मचारियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि वे खुद को कर्मचारी के बजाय अधिकारी समझने लगे हैं।
गृहग्राम में पदस्थ रहने से बढ़ता है प्रभाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बाबू अपने गृहग्राम या आसपास के क्षेत्र में वर्षों से पदस्थ हैं। ऐसे में उनका स्थानीय स्तर पर प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे कामकाज में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व से जुड़े छोटे-छोटे कार्यों जैसे नामांतरण, बंटवारा, नक्शा, सीमांकन, खसरा नकल और अन्य दस्तावेजों के लिए आम लोगों को कई बार अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ग्रामीण अंचलों के लोगों का यह भी कहना है कि कुछ स्थानों पर वर्षों से जमे कर्मचारियों के कारण सांठगांठ और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। इससे आम लोगों को अपने ही वैध कार्य कराने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बुद्धिजीवी वर्ग ने उठाई पारदर्शी तबादले की मांग
जिले के बुद्धिजीवी वर्ग और सामाजिक संगठनों का मानना है कि जिस तरह प्रशासन ने पटवारियों के तबादले कर एक सकारात्मक संदेश दिया है, उसी प्रकार राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों पर भी समान नीति लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से एक ही जगह पर जमे कर्मचारियों की सूची तैयार कर पारदर्शी तरीके से तबादला किया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार में कमी और कामकाज में आएगी तेजी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व विभाग में लंबे समय से जमे कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण किया जाता है तो इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि कार्यालयों में लंबित मामलों का भी तेजी से निपटारा होगा। इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
अब जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि पटवारियों के बाद क्या प्रशासन राजस्व विभाग के बाबुओं पर भी कार्रवाई करेगा या नहीं। आम जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।




