डीएमएफ मद से लगे नलकूप का कलेक्टर ने किया निरीक्षण

आधा किलोमीटर पैदल चलकर खेत तक पहुँचे कलेक्टर, ग्रामीणों में दिखा उत्साह
भारत सम्मान / सूरजपुर / फिरोज खान —
जिले में डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) मद से स्वीकृत योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए कलेक्टर एस. जयवर्धन ने विकासखंड भैयाथान के ग्राम पंचायत टइयां का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर एक नलकूप को देखने के लिए लगभग आधा किलोमीटर पैदल चलकर कृषक के खेत तक पहुँचे, जिसे देखकर ग्रामीण और किसान खासे प्रभावित नजर आए।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी कलेक्टर को खेत तक पैदल पहुँचते देखा है। कलेक्टर की यह कार्यशैली ग्रामीणों में भरोसा और प्रशासन के प्रति सकारात्मक संदेश लेकर आई।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्राम टइयां निवासी कृषक सहदेव के खेत में निर्मित कूप निर्माण एवं नलकूप खनन कार्य का जायजा लिया। साथ ही खेत में लगी सरसों एवं आलू की फसल को देखकर किसान द्वारा की जा रही मेहनत और उन्नत कृषि पद्धति की सराहना की।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में डीएमएफ मद से हैंडपंप एवं नलकूप खनन की स्वीकृति दी गई थी। कलेक्टर ने मौके पर यह भी परखा कि योजना का लाभ शत-प्रतिशत पात्र किसानों तक पहुँच रहा है या नहीं, तथा स्वीकृत कार्यों में सभी शर्तों, नियमों और पारदर्शिता मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि डीएमएफ मद से स्वीकृत योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो, और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा का वास्तविक लाभ मिले। इसी क्रम में कलेक्टर ने ग्रामीणों और कृषकों से सीधी चर्चा कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डीएमएफ मद से स्वीकृत सभी कार्यों की नियमित निगरानी, भौतिक सत्यापन और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक समय पर पहुँच सके।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम श्रीमती चांदनी कंवर, उप संचालक कृषि संपदा पैकरा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मनीष शर्मा, कृषि विकास अधिकारी लक्ष्मीकांत कुशवाहा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी गिरीश चंद कुशवाहा सहित कृषक वन स्वरूप, सिद्धनाथ एवं सहदेव उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने कलेक्टर के इस दौरे को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इस तरह के जमीनी निरीक्षण से प्रशासनिक योजनाओं पर भरोसा बढ़ता है और किसानों को यह एहसास होता है कि उनकी मेहनत और समस्याओं को गंभीरता से सुना जा रहा है।



