बसंतपुर थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप, युवक की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया, रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी और दुर्व्यवहार के भी लगे आरोप
बलरामपुर | विशेष रिपोर्ट | रामहरी गुप्ता
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलीडूमर में एक युवक की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में बसंतपुर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सोनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मृतक के परिजनों ने जहां इसे हत्या कर शव को फांसी पर लटकाने का मामला बताया है, वहीं पुलिस पर रिपोर्ट दर्ज करने में लापरवाही और असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 04 अप्रैल 2026 को ग्राम फुलीडूमर निवासी मनोज (23 वर्ष) और हरिकिशन (32 वर्ष) द्वारा गांव के ही सुख सिंह आयाम को बहला-फुसलाकर मोटरसाइकिल में बैठाकर कहीं ले जाया गया। शाम तक सुख सिंह के घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
अगले दिन सुबह जानकारी मिली कि प्रेमनगर के जंगल में एक युवक का शव पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका हुआ है। सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जहां बसंतपुर पुलिस पहले से मौजूद थी। ग्रामीणों के अनुसार, जिस पेड़ पर शव लटका हुआ था, वहां परिस्थितियां आत्महत्या से मेल नहीं खा रही थीं। परिजनों का आरोप है कि जिस गमछे से शव लटका था, उसमें ऐसी गांठ थी जिससे फांसी लगाना संभव नहीं था। साथ ही मृतक के कान और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान भी पाए गए, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है।
घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए वाड्रफनगर भेज दिया और बाद में परिजनों को सौंप दिया। लेकिन इसके बाद से ही पीड़ित परिवार को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
परिजनों का आरोप है कि जब वे 6 अप्रैल को बसंतपुर थाना पहुंचे और प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद एएसआई तिवारी ने उन्हें डांटकर भगा दिया। इसके बाद तीन दिन पश्चात पुनः थाने पहुंचने पर भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार किया गया। अंततः 16 अप्रैल को गांव के एक युवक की मदद से आवेदन लिखवाकर थाने में जमा किया गया, तब जाकर पुलिस ने आवेदन स्वीकार कर पावती दी।
मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि आरोपी हरिकिशन के खिलाफ पहले भी गांव में विवाद की स्थिति बनी थी। बताया जाता है कि 4 फरवरी 2026 को ग्राम पंचायत स्तर पर बैठक आयोजित कर उसे चेतावनी दी गई थी, जिसमें उसने स्वयं स्वीकार किया था कि भविष्य में किसी भी प्रकार की घटना होने पर वह जिम्मेदार होगा।
वर्तमान में मृतक का परिवार न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि आरोपित खुलेआम गांव में घूम रहे हैं। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करती, तो घटना की सच्चाई सामने आ सकती थी।
इस पूरे मामले में बसंतपुर थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना स्तर पर संवेदनशीलता की कमी के कारण पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में देरी हो रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस खबर के प्रकाशन के बाद पुलिस अधीक्षक बलरामपुर द्वारा इस मामले में क्या संज्ञान लिया जाता है और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



