छत्तीसगढ़ फार्मेसी परिषद में रजिस्ट्रार नियुक्ति को लेकर विवाद गहराया, फार्मासिस्ट संगठनों ने उठाई पारदर्शिता की मांग

रायपुर । भारत सम्मान
छत्तीसगढ़ में फार्मेसी क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन (ABPA), छत्तीसगढ़ शाखा सहित विभिन्न फार्मासिस्ट संगठनों ने छत्तीसगढ़ राज्य फार्मेसी परिषद में रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संगठनों का आरोप है कि रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति में नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में संगठनों ने शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि नियुक्ति Pharmacy Act 1948 और Pharmacy Rules 1978 के प्रावधानों के अनुरूप ही होनी चाहिए।
PCI के निर्देशों का हवाला
ज्ञापन में बताया गया है कि Pharmacy Council of India द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, रजिस्ट्रार पद पर केवल पंजीकृत और योग्य फार्मासिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य है। साथ ही चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया है।
संगठनों का कहना है कि यदि इन नियमों की अनदेखी कर नियुक्ति की जाती है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि पूरे फार्मासिस्ट समुदाय में असंतोष की स्थिति भी उत्पन्न करेगा।
न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लेख
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के तहत राज्य सरकार को रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया को विधिसम्मत तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि नियमों से हटकर नियुक्ति होती है, तो यह न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।
आंदोलन की चेतावनी
फार्मासिस्ट संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
शासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, राज्यपाल, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है। संगठनों ने मांग की है कि मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर निष्पक्ष और नियमसम्मत नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
छत्तीसगढ़ फार्मेसी परिषद में रजिस्ट्रार की नियुक्ति का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। यदि समय रहते पारदर्शी समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा प्रदेशभर में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।




