सधवानी केंद्रीय नर्सरी में करोड़ों के गबन के आरोप, वनरक्षक पर फर्जी बिल-बाउचर से राशि निकालने का मामला

मरवाही / जीपीएम | सुष्मिता मिश्रा
मरवाही वनमंडल के खोडरी परिक्षेत्र अंतर्गत स्थित केंद्रीय नर्सरी सधवानी में पौधा तैयारी और पौधरोपण कार्य के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। नर्सरी में पदस्थ वनरक्षक राकेश राठौर पर फर्जी बिल-बाउचर तैयार कर शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
स्वीकृत रकबे से कम क्षेत्र में कराया पौधरोपण
जानकारी के अनुसार सधवानी परिसर रक्षक रहते हुए राकेश राठौर को केंद्रीय नर्सरी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इसी दौरान उन्हें ग्रीन कैडेट योजना के तहत दो स्थानों पर पौधरोपण का कार्य भी सौंपा गया था। आरोप है कि स्वीकृत रकबे के अनुसार पौधरोपण नहीं कराया गया और निर्धारित क्षेत्रफल से कम जगह पर ही पौधे रोपकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया।

मजदूरों की जगह जेसीबी से खुदवाए गए गड्ढे
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पौधरोपण के लिए गड्ढों की खुदाई मजदूरों से कराई जानी थी ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। लेकिन इसके विपरीत जेसीबी मशीन से गड्ढे खुदवाए गए, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों से काम कराया जाना दर्शाया गया है। इससे मजदूरी के नाम पर फर्जी भुगतान की आशंका जताई जा रही है।
जंगल से लाकर लगाए छोटे पौधे
मामले में यह भी आरोप है कि प्राक्कलन के अनुसार तैयार किए गए पौधों का उपयोग नहीं किया गया। इसके बजाय जंगल क्षेत्र से छोटे पौधे लाकर रोपित कर दिए गए और पौधा तैयारी के नाम पर भारी भरकम बिल लगा दिए गए। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मजदूरी के नाम पर भुगतान की राशि कथित तौर पर करीबियों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कराई गई।
जांच में सही पाए गए थे आरोप
बताया जाता है कि इस मामले की शिकायत सीसीएफ बिलासपुर से की गई थी। उस समय पदस्थ सीसीएफ प्रभात मिश्रा ने स्वयं मौके पर पहुंचकर रोपण कार्य की जांच की थी। जांच में शिकायत को सही पाए जाने पर खोडरी परिक्षेत्र सहायक उदय तिवारी और वनरक्षक राकेश राठौर को निलंबित कर अटैच कर दिया गया था।
निलंबन के बाद फिर उसी जगह पोस्टिंग
हालांकि आरोप है कि कुछ ही समय बाद प्रभाव और कथित रूप से पैसों के दम पर राकेश राठौर की बहाली हो गई और उनकी पोस्टिंग फिर से केंद्रीय नर्सरी सधवानी में कर दी गई। यह आदेश उस समय विभाग के भीतर चर्चा का विषय बना रहा। आरोप यह भी है कि तत्कालीन डीएफओ मरवाही गृष्मी चंद द्वारा न तो आरोप पत्र जारी किया गया और न ही मामले में आगे कोई सख्त कार्रवाई की गई।
संपत्ति को लेकर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक सामान्य वनरक्षक होने के बावजूद राकेश राठौर ने कथित रूप से फर्जी बिल-बाउचर और फर्मों से मिलीभगत कर कम समय में बड़ी संपत्ति अर्जित कर ली है। आरोप है कि गबन के पैसों से आलीशान मकान, चार पहिया वाहन और कृषि भूमि खरीदी गई है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि वनरक्षक राकेश राठौर की नौकरी लगने के समय से लेकर अब तक की चल-अचल संपत्ति की जांच कराई जाए। साथ ही मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लग सके।



