छत्तीसगढ़दिल्लीपत्रकारिताभारतराजनीतिलाइफस्टाइललेख, आलेख, रचनाविधि व न्यायसरगुजा संभागसोशल मीडिया

क्या विधायक से कट गए संगठन के सिपाही? सोनहत में भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराज़गी खुलकर आई सामने

कोरिया/सोनहत | विशेष रिपोर्ट – सब्बीर मोमिन

राजनीति में न तो रिश्ते स्थायी होते हैं, न नाराज़गी… लेकिन कभी-कभी नाराज़गी इतनी स्थायी हो जाती है कि मंच पर कुर्सियाँ खाली रह जाती हैं और पोस्टर में चेहरे ग़ायब। कुछ ऐसा ही नज़ारा इन दिनों भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र में देखा जा रहा है, जहाँ स्थानीय विधायक के दौरों में भाजपा संगठन के कर्मठ कार्यकर्ता गायब नज़र आ रहे हैं।

विधायक अकेले दौरे पर, संगठन अलग मोर्चे पर?

पिछले कुछ महीनों में ऐसा कई बार देखा गया है कि विधायक कार्यक्रमों में उपस्थित रहते हैं, परंतु उनके साथ भाजपा मंडल के ज़मीनी कार्यकर्ता नहीं दिखते। विपक्ष में रहते जिन कार्यकर्ताओं ने झंडा, डंडा और सोशल मीडिया के मोर्चे पर लड़ाई लड़ी थी, वे अब कहीं किनारे बैठे दिखते हैं। सवाल उठ रहे हैं — क्या ये कार्यकर्ता खुद दूर हो गए या दूर कर दिए गए?

बाहरी ठेकेदारों का विरोध बना कारण?

कुछ दिन पहले भाजपा मंडल महामंत्री और अन्य पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर दो बाहरी ठेकेदारों के खिलाफ मोर्चा खोला। आरोप था कि ये ठेकेदार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को धमका रहे हैं। लेकिन जल्द ही यही ठेकेदार विधायक के साथ फोटो में मुस्कराते दिखे। उसके बाद जो हुआ वो शायद ‘राजनीति का क्लासिक मोड़’ था — ठेकेदारों के विरोधियों को मंच से दूरी बनाते हुए देखा गया।

क्या विरोध कर संगठन कार्यकर्ताओं ने अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार ली?

यह सवाल अब आमजन भी पूछ रहे हैं, क्योंकि कई पुराने भाजपाई अब चुप हैं और पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बना चुके हैं।

श्रीनगर की पकड़, सोनहत का गुस्सा

स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं की एक और शिकायत है कि श्रीनगर क्षेत्र के लोग, जो विधायक के नज़दीकी माने जाते हैं, सोनहत क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने की कोशिश कर रहे हैं। सोनहत के कार्यकर्ताओं का दावा है कि इन्हीं बाहरी लोगों ने चुनाव में भाजपा का विरोध किया था, और अब सत्ता का लाभ बटोर रहे हैं।

यह भी आरोप है कि इन बाहरी लोगों के रिश्तेदारों को भी लाभ पहुँचाया जा रहा है, जबकि सोनहत के कार्यकर्ता हाशिए पर हैं। चुनाव जीतने वालों को संघर्ष और वादा याद रह गया है, लेकिन सत्ता में लाभ नहीं मिल रहा।

पूर्व कांग्रेस विधायक के सचिव का भाजपा कार्यक्रम में प्रभाव!

विवाद तब और गहरा गया जब एक पंचायत सचिव, जो पहले कांग्रेस विधायक का करीबी रहा, वह भाजपा विधायक के आयोजन में पूरा कार्यक्रम संचालित करता दिखा। जब यह बात भाजपा कार्यकर्ताओं को पता चली, तो उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। यहां तक कि जनपद अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य भी नाराज़ हो गए।

“जिसने कांग्रेस के लिए प्रचार किया, वही अब भाजपा की मलाई खा रहा है” — यह बात अब कार्यकर्ताओं के बीच खुले आम कही जा रही है।

सोशल मीडिया पोस्ट में ‘कालनेमि’ कौन?

विवाद की चिंगारी तब और भड़की जब विधायक के निज सहायक ने एक फेसबुक पोस्ट किया –

“कालनेमियों ने कभी हनुमान जी का रास्ता नहीं रोका है”

अब सवाल यह उठ रहा है —

क्या यह ‘कालनेमि’ टिप्पणी संगठन के कार्यकर्ताओं की ओर इशारा थी?

अगर हाँ, तो क्या भाजपा के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ता आज विधायक के सहायक की नजर में ‘कालनेमि’ हो गए हैं?

कार्यकर्ता चुप हैं, लेकिन नाराज़ हैं। सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वालों में वही लोग शामिल हैं, जो ठेकेदारों के करीबी माने जाते हैं। जनता में चर्चा है कि शायद विधायक को इन पोस्ट्स की जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बाद भी चुप्पी सवालों को और गहरा कर रही है।

जनपद अध्यक्ष का फोटो, नाम गायब — संकेत बड़ा?

एक और दिलचस्प घटना विधायक के सोशल मीडिया से जुड़ी है। विधायक के एक कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष साथ बैठी दिखती हैं, लेकिन फेसबुक पोस्ट में उनका नाम तक नहीं लिखा गया।

क्या यह भूल थी या संकेत?

निष्कर्ष: भाजपा कार्यकर्ताओं के दिलों में सवाल – क्या हमने संघर्ष कर ग़लती कर दी?

सोनहत की सियासत में अब ये सवाल आम हो चला है कि —

क्या भाजपा कार्यकर्ताओं ने सत्ता दिलाकर अपनी ही जमीन खो दी?

कार्यकर्ता मंच से नदारद हैं, पोस्टर से ग़ायब हैं और सोशल मीडिया पर ‘कालनेमि’ भी कहलाए जा रहे हैं।

अगर यह स्थिति नहीं बदली, तो भाजपा के अपने कार्यकर्ता ही अगले चुनाव में सबसे बड़ा सवाल बन सकते हैं।

Bharat Samman

Bharat Samman

यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा, अपराध, राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है। Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री (समाचार/फोटो/विडियो आदि) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता/खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र अम्बिकापुर होगा।

Related Articles

Back to top button