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पहाड़ी कोरवा आत्महत्या मामला: सर्व आदिवासी समाज ने NH-343 पर किया चक्का जाम, उठाई 7 सूत्रीय मांगें

सवाल है: आदिवासी की ज़मीन और जान क्या सिस्टम में सुरक्षित है? या फिर न्याय के लिए सड़क ही अंतिम रास्ता बन गया है?

बलरामपुर, 23 जून 2025 | विशेष संवाददाता

बलरामपुर ज़िले में एक बार फिर आदिवासी आक्रोश सड़क पर नजर आया। बरियों पुलिस चौकी अंतर्गत भेस्की गांव में पहाड़ी कोरवा समुदाय के सदस्य भईरा कोरवा की आत्महत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने NH-343 पर चक्का जाम किया। टेंट, पंडाल और अनिश्चितकालीन धरना के साथ आंदोलनकारियों ने प्रशासन को 7 सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद एक घंटे चला चक्का जाम समाप्त किया गया।

क्या है मामला?

सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि विनोद अग्रवाल, प्रवीण अग्रवाल और उनके सहयोगियों ने आदिवासी क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे शिवा और कमला देवी के नाम पर पहाड़ी कोरवा और अन्य आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ ज़मीन हड़प ली।

इतना ही नहीं, भईरा कोरवा को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया और इससे पहले आदिवासी बोदरो गोंड को क्रेशर में डालकर जिंदा हत्या कर दी गई थी।

सात सूत्रीय मांगें क्या हैं?

भईरा कोरवा के परिजनों को ₹2 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। यह राशि DMF फंड से या विनोद अग्रवाल की संपत्ति जब्त कर दी जाए। जमीन हड़पने में संलिप्त सभी दलालों, एजेंटों व व्यक्तियों पर SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(f), 3(1)(d), 3(2)(vA) के तहत एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए। बोदरो गोंड की हत्या के मामले को पुनः खोला जाए, और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ हत्या व SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाए। शिवा के नाम की गई फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर जुबरों की जमीन वापस दिलाई जाए। भेस्की और बरियों के पहाड़ी कोरवा आदिवासियों की ज़मीन पर कराई गई सभी फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त कर, भूमि पुनः आदिवासियों को लौटाई जाए। भेस्की, बरियों, बघिमा, घोरघड़ी, डिगनगर में संचालित सभी क्रेशरों की जांच, अवैध लीज निरस्त कर NGT नियमों का पालन कराना सुनिश्चित किया जाए। कृष्णा और सोमारी की संयुक्त भूमि की जबरन रजिस्ट्री मामले में दर्ज आवेदन पर FIR दर्ज कर, आरोपियों विनोद, प्रवीण, सुनिल अग्रवाल, सुदामा श्रीवास्तव, उदय शर्मा, कमला देवी, राहुल सिंह, यसवंत कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।

प्रशासनिक स्थिति

प्रदर्शन के दौरान कुसमी SDOP इमानुएल लकड़ा, SDM देवेंद्र कुमार प्रधान, नायब तहसीलदार नरेंद्र कंवर, राजपुर थाना प्रभारी भारद्वाज सिंह, शंकरगढ़ थाना प्रभारी जितेंद्र जायसवाल, सामरी थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह, पस्ता थाना प्रभारी विमलेश सिंह, बरियों चौकी प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह सहित करीब 50 पुलिस जवान मौके पर तैनात रहे।

निष्कर्ष: क्या आदिवासी समाज को मिलेगा न्याय?

सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

अब प्रशासन पर जिम्मेदारी है कि वह फर्जीवाड़े, जबरन ज़मीन कब्जा और आदिवासियों के उत्पीड़न पर कठोर कार्रवाई करे, ताकि पहाड़ी कोरवा समाज और अन्य आदिवासियों को न्याय मिल सके।

Bharat Samman

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