अंबिकापुर-रामानुजगंज NH-343 की बदहाली: भारी वाहन ग्रामीण सड़कों पर, प्रशासन की चुप्पी से जनता में रोष

अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ | 10 जुलाई 2025: राष्ट्रीय राजमार्ग 343 (NH-343) का अंबिकापुर से रामानुजगंज तक का हिस्सा बदहाल स्थिति में है, जिसके चलते रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ से आने वाली यात्री बसें और भारी वाहन अब ग्रामीण रास्तों का सहारा ले रहे हैं। इस जर्जर सड़क की वजह से यात्री और मालवाहक वाहन प्रतापपुर, सेमरसोत और बलरामपुर होकर वैकल्पिक मार्गों से सफर कर रहे हैं, जो मूल रूप से सिंगल-लेन ग्रामीण सड़कें हैं। ये सड़कें भारी वाहनों के लिए डिज़ाइन नहीं की गई थीं, और अब ये भी टूटने की कगार पर हैं।
NH-343 की खस्ता हालत
NH-343 का अंबिकापुर से रामानुजगंज खंड बड़े-बड़े गड्ढों और टूटी सड़कों के कारण बदहाल है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हल्कीबारिशमेंभीसड़कतालाबबनजातीहै।गड्ढोंकीवजहसेलोग 50 किमीअतिरिक्तदूरीतयकरनेकोमजबूरहैं।” इस स्थिति के कारण बस ऑपरेटरों ने NH-343 को छोड़कर ग्रामीण मार्गों का उपयोग शुरू कर दिया है।
ग्रामीण सड़कों पर संकट
प्रतापपुर से सेमरसोत तक का वैकल्पिक मार्ग, जो एक सिंगल-लेन ग्रामीण सड़क है, भारी वाहनों की आवाजाही से क्षतिग्रस्त हो रहा है। यह सड़क न तो इतने ट्रैफिक के लिए बनी है, न ही सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही, तो बरसात में यह सड़क भी NH-343 जैसी जर्जर हो जाएगी।
हैरानी की बात यह है कि इन वाहनों को NH-343 पर चलने का परमिट है, फिर भी नियमों की अनदेखी कर ग्रामीण मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। प्रश्न उठता है कि क्या परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं? या फिर यह जानबूझकर की गई अनदेखी है?
प्रशासन की चुप्पी, जनता में आक्रोश
स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। एक यात्री, रमेश साहू, ने कहा, “NH-343 की मरम्मत के लिए बार–बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।अब ग्रामीण सड़कें भी टूट रही हैं।आखिर प्रशासन कब जागेगा?” सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। एक X पोस्ट में लिखा गया, “अंबिकापुर–रामानुजगंज रोड पूरा नाला बन चुका है। @nitin_gadkari जी, कम से कम गड्ढे तो भरवा दीजिए।”
मरम्मत की उम्मीद, लेकिन कब?
हालांकि, कुछ राहत की खबरें भी हैं। जुलाई 2025 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने NH-343 को फोर-लेन सड़क में अपग्रेड करने के लिए 450 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। अधिकारियों के अनुसार, बारिश का मौसम खत्म होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। इसके अलावा, बड़कीमहुरी से रामानुजगंज खंड में 199.5 करोड़ रुपये और अंबिकापुर से रजपुरीखुर्द-पाढी खंड में 397.44 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण का टेंडर भी जारी हो चुका है।
लेकिन स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब तक यह काम शुरू नहीं होता, तब तक ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही कैसे रोकी जाएगी?
जनता की मांग और सवाल
स्थानीय जनता ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रमुख सवाल हैं:
• किसकी अनुमति से भारी वाहन ग्रामीण मार्गों पर चल रहे हैं?
• क्या परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को इस अवैध मार्ग परिवर्तन की जानकारी नहीं?
• क्या जानबूझकर आंख मूंद ली गई है?
युवा कांग्रेस ने भी 9 जुलाई 2025 को राजपुर तहसील कार्यालय के सामने चक्का जाम करने की चेतावनी दी है, अगर सड़क की मरम्मत और अवैध मार्ग परिवर्तन पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई।
आगे क्या?
NH-343 की मरम्मत और फोर-लेन प्रोजेक्ट भविष्य में राहत दे सकता है, लेकिन तब तक ग्रामीण सड़कों पर बढ़ता दबाव और यात्रियों की परेशानी चिंता का विषय है। यदि प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो बारिश के मौसम में स्थिति और बिगड़ सकती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अवैध मार्ग परिवर्तन पर रोक लगे और NH-343 की तत्काल मरम्मत की जाए।
जनता की पुकार: प्रशासन नींद से जागे, वरना यह संकट और गहराएगा!



